अधूरे प्यार ने बनाया निदा को शायर: फिर दुनिया हो गई उनकी कायल

कहते हैं कि सूरदास की एक कविता सुनकर निदा ने ये फैसला किया था कि वो भी शायर बनेंगे. लोग बताते हैं कि कॉलेज में निदा को अपने क्लास की एक लड़की से लगाव हो गया था लेकिन एक दिन अचानक नोटिस बोर्ड पर उस लड़की की मौत की खबर से निदा विचलित हो गए. गम में डूबे निदा फाजली एक मंदिर के सामने से गुजर रहे थे तभी उन्हें सूरदास की एक कविता सुनाई दी, कविता में राधा और कृष्ण के विरह का जिक्र था.

कविता सुन निदा इतने भावुक हुए कि उन्होंने ये फैसला कर लिया कि अब कविता और शायरी ही उनकी जिंदगी है.

पिता भी शेरो-शायरी में दिलचस्पी लिया करते थे और उनका अपना काव्य संग्रह भी था, जिसे निदा फाजली अक्सर पढा करते थे.

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं… रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम है
निदा फ़ाज़ली द्वारा लिखी कुछ दिल को छू जाने वाली कविता पढ़ते है ……

कभी कभी यूं भी हमने अपने जी को बहलाया है
जिन बातों को खुद नहीं समझे औरों को समझाया है

मीरो ग़ालिब के शेरों ने किसका साथ निभाया है
सस्ते गीतों को लिख लिखकर हमने घर बनवाया है

पूछो इज़्जत वालों की इज़्जत का हाल कभी
हमने भी इक शहर में रहकर थोड़ा नाम कमाया है

उसको भूले मुद्दत गुज़री लेकिन आज न जाने क्यों
आंगन में हंसते बच्चों को बेकारण धमकाया है

उस बस्ती से छूटकर यूं तो हर चेहरे को याद किया
जिससे थोड़ी सी अनबन थी वो अक्सर याद आया है

कोई मिला तो हाथ मिलाया, कहीं गए तो बात की
घर से बाहर जब भी निकले दिन भर बोझ उठाया है

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