अनाज उत्पादन के रिकॉर्ड स्तर पर भारत, 2017-18 में पैदा हुआ 284.83 मिलियन टन अनाज

मंगलवार, 28 अगस्त को सरकार ने कृषि उत्पादन का नवीनतम अनुमान जारी किया। इसके अनुसार, पिछले साल अच्छी मानसून की वज़ह से हुई बारिश के कारण फसल वर्ष 2017-18(जुलाई-जून) के दौरान भारत ने 284.83 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर अनाज का उत्पादन किया। यह उत्पादन फसल वर्ष 2016-17 के दौरान हुए उत्पादन से 9.72 मिलियन टन अधिक है।

वास्तव में साल 2017-18 के दौरान सभी प्रमुख फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन देखा गया। चावल 112.91 मिलियन टन, गेहूँ 99.70 मिलियन टन, मोटे अनाज 46.99 मिलियन टन और दालें 25.23 मिलियन टन पैदा हुईं। कृषि मंत्रालय ने साल 2017-18 के लिए मंगलवार को कृषि उत्पादन का अपना चौथा और अंतिम अनुमान जारी किया। मंत्रालय ने इस रिकॉर्ड उत्पादन के लिए पिछले साल मानसून के दौरान “सामान्य वर्षा” का हवाला दिया है। कृषि मंत्रालय ने इस साल के लिए मई में 279.51 मिलियन टन से संशोधन करके अब कुल उत्पादन 284.83 मिलियन टन कर दिया है। चौथा अनुमान अंतिम आंकड़े के रूप में अच्छा माना जा रहा है।

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कम बारिश के बावजूद साल 2018-19 अनाज पैदावार के लिहाज से अच्छा फ़सल वर्ष साबित होगा

खरीफ फसलों के चल रहा बुवाई (गर्मी में हुई बुवाई) इस बात को प्रदर्शित करता है कि यद्यपि वर्तमान वर्ष(2018-19) इस साल हुए रिकॉर्ड पैदावार को नहीं छू पाएगा। फ़िर भी यदि कोई चल रहे बुवाई संचालन, वर्तमान कृषि क्षेत्र औऱ देश भर में प्रमुख जल भंडारण का वर्तमान विश्लेषण करता है तो साल 2018-19 अनाज पैदावार के लिहाज से अच्छा फ़सल वर्ष साबित होगा।

कृषि आंकड़े बताते हैं कि पिछले शुक्रवार को खरीफ फसलों के तहत देश का कुल बोया गया क्षेत्र इसी सप्ताह के ‘सामान्य’ बोए गए क्षेत्र से अधिक था, हालांकि मानसून के मौसम के दौरान देश के कई जिलों में बारिश में कमी आई है। रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि भारत के 718 जिलों में से लगभग 40% ने अब तक विभिन्न डिग्री में बारिश में कमी का सामना किया है।

24 अगस्त तक खरीफ़ फ़सल के तहत कुल 995.62 लाख हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हुई है। जबकि पिछले साल इस अवधि के दौरान कुल 1008.57 लाख हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हुई थी। इसका मतलब इस साल पिछले साल के मुकाबले 1.3% कम जमीन पर बुवाई हुई है। हालांकि, अधिकारियों को उम्मीद है कि यह अंतराल आगे चलकर घट जाएगा क्योंकि जिन क्षेत्रों में कम बारिश हुई थी वहां अब बारिश होने लगी है। इससे बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

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आइये अब कुछ आंकड़ों पर नज़र डालते हैं:-

◆ फ़सल वर्ष 2012-13(जुलाई-जून) में 257.13 मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ फ़सल वर्ष 2013-14(जुलाई-जून) में 265.04 मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ फ़सल वर्ष 2014-15(जुलाई-जून) में 252.02 मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ फ़सल वर्ष 2015-16(जुलाई-जून) में 251.57 मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ फ़सल वर्ष 2016-17(जुलाई-जून) में 275.11 मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ फ़सल वर्ष 2017-18(जुलाई-जून) में 284.83(चौथा अनुमान) मिलियन टन पैदावार हुआ।

◆ साल 2014-15 और 2015-16 को सूखा वर्ष घोषित किया गया था।

◆ पूरे मानसून सीज़न के दौरान जून से सितंबर तक 10% से कम बारिश को सूखा वर्ष माना जाता है।

फ़सल वर्ष 2016-17 और फ़सल वर्ष 2017-18 में अंतर:-

◆ चावल:- 2016-17= 109.70 मिलियन टन, 2017-18= 112.91 मिलियन टन, कुल बढ़त= 2.92%.

◆ गेहूँ:- 2016-17= 98.51 मिलियन टन, 2017-18= 99.70 मिलियन टन, कुल बढ़त= 1.20%.

◆ मोटा अनाज:- 2016-17= 43.77 मिलियन टन, 2017-18= 46.99 मिलियन टन, कुल बढ़त= 7.35%.

◆ दालें:- 2016-17= 23.13 मिलियन टन, 2017-18= 25.23 मिलियन टन, कुल बढ़त= 9.07%.

◆ तिलहन:- 2016-17= 31.26 मिलियन टन, 2017-18= 31.30 मिलियन टन, कुल बढ़त= 0.12%.

◆ गन्ना:- 2016-17= 306.06 मिलियन टन, 2017-18= 376.90 मिलियन टन, कुल बढ़त= 23.14%.

◆ कपास:- 2016-17= 32.57 मिलियन टन, 2017-18= 34.88 मिलियन टन, कुल बढ़त= 7.09%.

◆ अनाज:- 2016-17= 275.11 मिलियन टन, 2017-18= 284.83 मिलियन टन, कुल बढ़त= 3.53%

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