अपनी ही करनी पर पछता रहा बलूचिस्तान…..

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भारत-पाकिस्तान बटवारे के समय पाकिस्तान (Pakistan) को अपना मसीहा मानने वाला बलूचिस्तान अब अपनी ही करनी पर रो रहा है। आजादी की गुहार लगा रहे बलूचिस्तान का सुनने वाला कोई नहीं। इसी वजह से कई बार जंग हुआ। यह जंग कभी ज्वालामुखी की तरह विकाराल रूप ले लेता है तो शांत वीरानियों का।

बटवारे के समय चार रियासतों मकरान, खरान, लास बेला, कलात के खनाते से बने बलूचिस्तान (Balochistan) ने पाकिस्तान (Pakistan) का दामन थामा और मार्च 1948 में समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिया। मगर कुछ बातों को लेकर खटास पैदा हो गई जो विवाद का कारण बनी।

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बलूचिस्तान (Balochistan) का इलाका सिर्फ पाकिस्तान (Pakistan) में ही नहीं बल्कि ईरान और अफगानिस्तान में भी आता है। यहां पर बलोच, पस्तुन, ब्राहुई, हजारा, जाति के लोग रहते हैं।पंजाबी और सिंधी भी यहां रहकर व्यापार करते हैं।

बलूचिस्तान (Balochistan) की राजधानी क्वेटा, सुलेमान माउंटेन में बसा हुआ है। यहां पर कई पहाड़ियां हैं। बोलन दर्रा और खैबर दर्रा दोनों पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान को जोड़ता है। क्वेटा पहुचने के लिए बोलन दर्रे से होकर गुजरना पड़ता है। बलूचिस्तान शुष्क, मरुस्थल तथा पहाड़ी इलाका है। यहां गरीबी का बोलबाला है।
कब कब हुआ जंग…

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आजादी की मांग के लिए शुरू हुए इस जंग की दास्तां काफी दयनीय है। आतंकिस्तान के नाम से दुनिया में नाम कमा रहे पाक के नापाक मंसूबों की साफ सुथरी तस्वीर आपको दिख जाएगी कि किस तरह कश्मीर का राग अलापने वाला पाकिस्तान (Pakistan) मानवता को शर्मसार कर रहा है।

1947 में जंग का शुभारंभ हुआ। फिर उसके बाद 1948 में शुरू हुआ मगर बलूचिस्तान (Balochistan) को हार का मुंह देखना पड़ा। जिससे बलूचिस्तान (Balochistan) की हिम्मत टूट गई और जंग अगले दस साल तक के लिये शांत हो गया।

सन 1958-59 में फिर आक्रोश की ज्वाला भड़की और खूनी संघर्ष शुरू हो गया मगर  पाकिस्तानी (Pakistan) सेना ने उनका दमन कर दिया।

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1962-63 ने भी युद्ध की घटनाओं का दीदार किया। पाकिस्तानी (Pakistan) सेना द्वारा दबाई जा रही आवाज 1973-74 में फिर उठी। जंग के इस ऐलान ने लोगों का रूह कंपा दिया। नरसंहार का ये खेल बड़े ही दमखम के साथ लड़ा गया। इसमें मिली हार के बाद बलूचिस्तान (Balochistan) की आवाज अगले 30 साल तक दब गई। इस खूनी जंग में पाकिस्तान(Pakistan) की तरफ से लगभग 3000, बलूचिस्तान की तरफ से लगभग 5300 और साथ ही 6000 के करीब नागरिक मारे गए।

30 साल बाद फिर जल रही ज्वाला भड़क उठी और 2004 में फिर से वहीं पुराना खेल शुरु हो गया। अफगानिस्तान और तालिबान लड़ाकों के बीच छिड़े 2001 के संघर्ष ने इस जंग में अपनी भूमिका निभाई। दरसअल, इस जंग के पीछे तालिबान लड़ाकों का हाथ था जिन्होंने आजादी के लिए बलूचिस्तान (Balochistan) की जनता को पाकिस्तान (Pakistan) सरकार के खिलाफ भड़काया। आज भी छिटपुट वारदात जारी हैं।

विवाद की जड़…..

बलूचिस्तान (Balochistan)  के सुई इलाके में प्राकृतिक गैस का भंडार है। इसके अलावा खनिज के भी भंडार हैं जिनपर पाकिस्तान (Pakistan) की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। पाकिस्तान अपनी जरूरतें तो पूरी कर लेता है मगर बलूचिस्तान के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिलता जिसकी वजह से गरीबी जैसे हालात हैं। लोग खाने के लिए तरस रहे हैं। यहां पर विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। यहां तक कि मूलभूत जरूरतें सड़क और बिजली भी नहीं है।

आजादी के लिए प्रयासरत संस्थाएं…..

आजादी के लिए बलूचिस्तान (Balochistan) की कुछ संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई है। बलोच लिबरेशन आर्मी, बलोच रिपब्लिकन आर्मी, बलोच लिबरेशन फ्रंट, बलोच रिपब्लिकन पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी मगर सफलता हाथ नहीं लग पाई है । बलोच रिपब्लिकन पार्टी के दो नेताओं ब्राहमदाह बुग्ती तथा अकबर बुग्ती ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई। मगर 2006 में पाकिस्तानी(Pakistan) सेना ने अकबर बुग्ती को मार गिराया। अपने इस लोकप्रिय नेता के मारे जाने के बाद वहां के लोगों में आक्रोश परवान चढ़ गया। और युद्ध गहरा गया।

बलूचिस्तान (Balochistan) की समस्याएं….

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पाकिस्तान (Pakistan)की सेना पर आरोप है कि वह आजादी की मांग करने वाले नेताओं का अपहरण कर लेती है और उन्हें मार देती हैं। अपहरण किये गए लोगों का उनके पास कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। पाकिस्तान ने मानवाधिकार के सभी हदों को पार करते हुए लोगों के दिलों में दहशत फ़ैलाया है। किडनैपिंग की भी समस्या काफी गंभीर है। सिया और सुन्नी के बीच आपसी कलह का माहौल है।
पाकिस्तान(Pakistan) के लिए बलूचिस्तान (Balochistan) की अहमियत…..
पाकिस्तान(Pakistan) का आधा हिस्सा बलूचिस्तान(Balochistan) में आता है। इन हिस्सों में पाकिस्तान(Pakistan) की 5 फीसदी ही आबादी रहती है। गैस और खनिज के भंडार हैं जिस पर पाकिस्तान जिंदा है। ग्वादर बंदरगाह को चीन को लीज पर दिया है। पाकिस्तान चीन इकॉनामिक कॉरिडोर, ईरान पाकिस्तान गैस पाइपलाइन से गैस सप्लाई होगी।

बलूचिस्तान (Balochistan) के दम पर जिंदा पाकिस्तान(Pakistan) दरिंदगी की हद को पार कर चुका है। भारत ने भी पाकिस्तान को कई बार इस मुद्दे पर घेरा है। कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब कर दिया है। यहीं वजह है जब पाकिस्तान की हर तरफ किरकिरी हो रही है।

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