आखिर आसिफा और ट्विंकल में फर्क क्या है? आखिर कब तक धर्म देखकर उठाया जाएगा अपराध के खिलाफ आवाज?

जम्मू के कठुआ की कहानी इतनी दर्दनाक थी कि जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। एक 8 साल की बच्ची के साथ बर्बरता की जाती है। यौन शोषण किया जाता है फिर उसके बाद ईट से उसके सिर को फोड़कर जान से मार दिया जाता है। इस बच्ची का नाम आसिफा था। जैसा कि नाम से मालूम पड़ता है कि यह बच्ची मुस्लिम समुदाय से थी। और इस घिनौने अपराध के लिए जो लोग आरोपी थे वे हिंदू समुदाय से थे।

इतना काफी था इस घटना को हिंदू बनाम मुस्लिम का रंग दे दिया गया। बॉलीवुड के कई अभिनेता और अभिनेत्रियों ने इस घिनौने अपराध के खिलाफ तख्ती लेकर विरोध प्रदर्शन किया और लिखा ‘I am Hindustan, I am ashamed. #JusticeForAsifa. 8 years old gangraped. Murdered in ‘Devi’ sthan Temple. #Kathua ऐसा करने के पीछे उनका मकसद सिर्फ हिंदू धर्म को बदनाम करना था। अगर वाकई इन लोगों के दिल में उस बच्ची के लिए दर्द था तो अलीगढ़ में 3 साल की बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई उसे लेकर इनकी जुबान सिली हुई क्यों है?

ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। हम आपको बता देते हैं कि अलीगढ़ में जो कुछ हुआ उसमें पीड़ित एक हिंदू लड़की है। जिसकी उम्र करीब 3 साल है और इस अपराध में आरोपी दो मुसलमान हैं। इस बार आसिफा के समर्थन में उतरने वाले लोग नजर तो नहीं आए लेकिन वे लोग उतर कर आए जिन्होंने लड़की के हिंदू होने के नाते उसका पक्ष लिया। इस बच्ची का नाम ट्विंकल शर्मा है। बताया जाता है कि ₹5000 के विवाद में दो मुसलमानों ने 3 साल की मासूम बच्ची की दरिंदगी के साथ हत्या कर उसे कहीं कूड़े में फेंक दिया जिसके शरीर को कुत्ते नोच रहे थे।

इस समय सोशल मीडिया पर #JusticeForTwinkleSharma ट्रेंड कर रहा है। वैसे तो महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाले अपराध के खिलाफ हमारा समाज काफी संवेदनशील माना जाता है और इसके खिलाफ आवाज भी उठाता है। लेकिन विडंबना यह है कि यह हैवानियत उसी समाज में होता है और इस समाज में दो तबके के लोग रहते हैं जो धर्म की पहचान करने के बाद उस अपराध के खिलाफ अपने सुविधानुसार आवाज उठाते हैं। और कहीं न कहीं यही वजह है कि अपराध को अंजाम देने वाले लोगों को पनाह मिल जाती है और वो लोग एक पक्ष का समर्थन पाकर अपने नापाक चेहरे को छुपाने में कामयाब रहते हैं।

सवाल यह उठता है कि जम्मू के कठुआ में 8 साल की लड़की आसिफा और अलीगढ़ में 3 साल की लड़की ट्विंकल शर्मा में फर्क क्या है? आख़िर दोनों तो लड़कियां ही हैं। अगर वाकई में हमारा समाज लड़कियों को लेकर इतना संवेदनशील है तो फिर धर्म के नाम पर बट क्यों जाता है? आसिफा और ट्विंकल पहले एक लड़की हैं उसके बाद क्रमशः मुसलमान और हिंदू। तो क्या यह मान लिया जाए कि आज धर्म के आगे मानवता दम तोड़ रही है? आखिर ये धर्म की नुमाइंदगी करने वाले लोग कब तक इस तरह अपने दोहरे चरित्र का प्रदर्शन करते रहेंगे और अपराधियों को पनाह देते रहेंगे?

~Shravan Pandey

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