आतंकी मसूद अजहर के सिर पर चीन का वरदहस्त, चौथी बार खड़ा किया रुकावट की दीवार

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एक बार फिर चीन ने भारत के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। तमाम कोशिशों के बावजूद आतंकी मसूद अजहर को ग्लोबल टेरेरिस्ट की लिस्ट में नहीं रखा जा सका। आतंकी मसूद अजहर पर चीन की मेहरबानी से भारत की परेशानी बढ़ गई है।

चीन ने यूनाइटेड नेशंस में जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में रखने के पक्ष में अपना मत नहीं रखा है। फ़्रांस, यूएस और यूके की कोशिशें विफ़ल हो गईं। पाकिस्तान की सरजमीं पर पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ही 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी।

इससे पहले भी चीन ने तीन बार इसी प्रपोजल को टेक्निकल होल्ड पर रखकर निरस्त कर दिया था। यह होल्ड अधिकतम 9 महीने तक रखा जा सकता है, जिसके बाद चीन अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर इस प्रपोजल को औपचारिक रूप से ब्लॉक या टर्मिनेट कर सकता है।

भारत सरकार ने कहा है कि वह इस नतीजे से निराश है। एक बयान में कहा गया है कि इसने इंटरनेशनल कम्युनिटी के एक्शन को रोका है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के लीडर को डेजिग्नेट करने की कोशिश की गई थी। यह एक प्रतिबंधित और सक्रिय आतंकी संगठन है, जिसने जम्मू-कश्मीर में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत सरकार ने कहा है कि भारत मेम्बर स्टेट के प्रयासों के लिए कृतज्ञ है जिन्होंने डेसिग्नेशन प्रपोजल को मूव किया।

आइये जानते हैं कि किस तरह अपनी दीवार के पीछे आतंकी मसूद अजहर को बचा रहा है चीन

साल 2009: भारत ने ख़ुद UN में जैश ए मोहम्मद के मुखिया को डेजिग्नेट करने के लिए प्रपोजल मूव किया था।

साल 2016: भारत ने फ़िर P3 देश (यूएस, यूके और फ़्रांस) के साथ मिलकर UN के 1267 सैंक्शन कमिटी में अजहर को बैन करने ले लिए एक प्रस्ताव दिया।

साल 2017: यूएस, यूके और फ़्रांस ने फ़िर वैसा ही प्रस्ताव दिया।

लेक़िन हर बार चीन ने अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल करके भारत के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। यह पहली बार था जब ऐसा प्रस्ताव किसी आतंकी हमले के तुरंत बाद लाया गया था।

अग़र अजहर UNSC के बैन लिस्ट में चला जाता तो उसकी सारी संपत्ति ज़ब्त हो जाती, उसे सफ़र करने से प्रतिबंधित कर दिया जाता और हथियार रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाता। चीन की इस हरकत के बाद से ही ट्विटर पर #ChinaBacksTerror #BoycottChina ट्रेंड करने लगा।

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