उत्तर प्रदेश ATS के ASP राजेश साहनी की संदिग्ध हालत में हुई मौत

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उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश एटीएस के एएसपी राजेश साहनी की संदिग्ध हालत में मौत हो गई है। ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने ATS कार्यालय में ही खुद को गोली मार ली है। राजेश साहनी के मौत की खबर से पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया। इस बात की खबर मिलते ही सूबे के आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। इस मामले की जांच की जा रही है ताकि मौत के कारणों का पता चल सके।

  • माना जाता है कि ASP राजेश साहनी ने ATS कार्यालय में अपनी सरकारी पिस्टल से खुद को मारी गोली
  • मौत की खबर मिलते ही मौके पर पहुंचे सूबे के आलाधिकारी
  • साल 1992 में पुलिस सेवा में आये थे साहनी, साल 2013 में अपर पुलिस अधीक्षक के पद हुई थी पदोन्नति 
  • एटीएस के तेज तर्रार अफसरों में गिने जाने वाले राजेश साहनी के नाम पर अपराधी खाते थे खौफ 

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ASP राजेश साहनी राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित एटीएस मुख्यालय में थे। उन्होंने अपने ड्राइवर से अपनी सरकारी पिस्टल मंगाई। और उसके कुछ समय बाद ही उन्होंने खुद को गोली मार दी। गोली लगने से उनकी मौत हो गयी। हालंकि, इस बाबत कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला है। सुसाइड के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

जानकारी के मुताबिक़, ASP राजेश साहनी साल 1992 में पुलिस सेवा में आए थे। साल 2013 में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर उनकी पदोन्नति हुई थी। एटीएस के तेज तर्रार अफसरों में गिने जाने वाले राजेश के नाम पर अपराधी खौफ खाते थे। उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। गौरतलब है कि राजेश काफी समय से तमाम आतंकी संगठनों के स्लीपर मॉड्यूल और भारत में आतंक की साजिशों को भी बेनकाब कर रहे थे। उत्तराखंड ऑपरेशन में राजेश साहनी के साथ उनकी टीम में इंस्पेक्टर मंजीत सिंह, एसआई शैलेंद्र गिरी, कंप्यूटर ऑपरेटर वकील अहमद, कांस्टेबल हरीश और मनोज शामिल थे।

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