एक हाथ में कुरान तो दूसरे में लैपटॉप

एक हाथ में कुरान तो दूसरे में लैपटॉप, अब तक क्यों पूरा नहीं हुआ वादा?

देश के सर्वांगीण विकास के लिए बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के तर्ज पर झारखंड की राजधानी रांची के लिए कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस बात का जिक्र किया था कि अब मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरान तो दूसरे में लैपटॉप होगा। इसका मकसद मुस्लिम बच्चों को आधुनिक दुनिया से जोड़ना या कह लो पढ़ाई में कंप्यूटर विषय को लाना था। अब तक क़ुरान की पढ़ाई तक सीमित मुस्लिम समुदाय के बच्चों को कंप्यूटर का ज्ञान देने के मकसद से यह एक अच्छी पहल कही जा सकती है। लेकिन दिल्ली का ये भाषण आज तक रांची नहीं पहुंच पाया। न ही यह बात पहुंची और न ही भेजा हुआ लैपटॉप। इस तरह दिल्ली से दिया हुआ भाषण दिल्ली तक सिमट कर रह गया।

ज्यादातर मदरसा में बच्चों के शिक्षा का स्तर बेहद चिंतनीय हैं। 1, 2 की गिनती करते-करते बच्चे 5वीं तक पहुंच जाते हैं। यहाँ तक की कक्षा 4 के बच्चों को यह नहीं पता होता कि एप्पल और मैंगो की स्पेलिंग क्या होती है। सूबे में लगभग 550 मदरसा हैं, जबकि काग़ज़ पर घट कर ये आधे हो जाते हैं। कुछ मदरसा की हालत इतनी ख़राब है कि आस-पास की दीवारें कभी भी बच्चों पर गिर सकती हैं। इस बारे में जब अंजुमन इस्लामिया से पूछा गया तो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी सरकार के सिर पर मढ़ दी। उनका कहना है कि बिना वेतन और अनुदान के पढ़ाई कैसे होगी। मदरसा की जर्जर हालत ही नहीं बल्कि वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों के वेतन की भी समस्या है। इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही मतलब निकाला जा सकता है कि अब गलती किसी की भी हो बच्चों का भविष्य तो खतरे में है। इस बाबत प्रशासन से हमारा सवाल है कि क्या आप सिर्फ राजनीति के लिए बयानबाजी करते हैं?

No Comments Yet

Leave a Reply

Your email address will not be published.

युवा देश से जुड़ी समाजिक सरोकार रखने वाली खबर, आम आदमी से जुड़े खास मुद्दों के करीब, बेवज़ह और बेतुके के ड्रामे से दूर, हवा हवाई बातों के इतर जमीनी हकीकत से जुड़ी खबरों को देखने के लिए सब्सक्राइब करे हमारा चैनल युवायु। Contact us: info@uvayu.com