कर्नाटक: स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत का जश्न मनाते कार्यकर्ताओं पर हुआ एसिड अटैक

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सोमवार को घोषित हुए कर्नाटक निकाय चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के अंदर उत्साह, उमंग और उल्लास का संचार कर दिया है। 105 स्थानीय शहरी निकाय चुनावों के नतीजों में कांग्रेस राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 2664 सीटों में से जिन 2662 सीटों के नतीजे का ऐलान किया गया, उसमे से सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस पार्टी के हिस्से आई। वो भी तब जब कांग्रेस स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य सरकार में अपनी सहयोगी पार्टी जेडीएस के बगैर अकेले अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरी थी। 31 अगस्त को हुए मतदान के बाद सोमवार को स्थानीय शहरी निकाय चुनावों के 2662 सीटों में से कांग्रेस 982 सीटों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, वहीं 929 सीटों के साथ भाजपा को दूसरे नंबर पर रहकर संतोष करना पड़ा। इन दोनों के अलावा कर्नाटक में फिलहाल जिस पार्टी का व्यक्ति मुख्यमंत्री है, उस जनता दल सेक्युलर के खाते में सिर्फ 375 सीटें ही आई। और निकाय चुनाव की में करीब 329 उम्मीदवार बिना किसी राजनीतिक पार्टी के झंडे तले लड़े, अपने दम पर ही चुनकर आ गए।

अपनी सहयोगी पार्टी जेडीएस के बगैर स्थानीय निकाय के चुनावी मैदान में उतरकर मैदान मार जाने के बाद कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकर्ता खुशी से झूमने लगें। लेकिन अपनी पार्टी की बंपर जीत को लेकर खुशी मना रहे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के रंग में तब भंग पड़ गया, जब किसी व्यक्ति ने जीत का जश्न मना रही भीड़ पर एसिड फेंक दिया। इसके चलते 10 कांग्रेसी कार्यकर्ता जख्मी हो गए और फिर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस एसिड हमले के पीछे किसका हाथ है।

स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को देखते हुए मोदी सरकार के कांग्रेस मुक्त भारत का सपना अब बहुत दूर की कौड़ी नजर आने लगा है। गुजरात में बीजेपी के हाथों सत्ता का फिसलते-फिसलते रह जाना, कर्नाटक चुनाव में लाख चुनावी तिकड़म बाजी के बावजूद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के आगे नतमस्तक हो जाना, फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हुए ओपिनियन पोल में कांग्रेस का सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरना और अब कर्नाटक राज्य के स्थानीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुनकर आना इस बात का संकेत है कि देश के अच्छे दिन आए ना आए लेकिन निकट भविष्य में कांग्रेस मुक्त दिन आने की कोई संभावना नजर नही आती।

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