काबुल में जन्में कादर खान की हिंदी सिनेमा में करिश्माई कलाकारी का 46 साल लंबा सफर!

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बाप नंबरी बेटा दस नंबरी, दूल्हे राजा, कुली नंबर 1, आंटी नंबर 1, हीरो नंबर 1, अँखियों से गोली मारे, साजन चले ससुराल, मुझसे शादी करोगी, हिम्मतवाला, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, आंखें, सिक्का, राजा बाबू…. यह सब क्या है? यह सब उन फिल्मों के नाम है जिनमे अभियन कर कादर खान साहब ने ना सिर्फ हमें पेट पकड़-पड़ककर हंसाया बल्कि कला की दुनिया में भी अभिनय का एक नया पैमाना तय कर दिया। अपनी कॉमडी के जरिए दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाला यह अभिनेता आज 1 जनवरी 2019 नए साल के पहले दिन इस दुनिया को अलविदा कह हम सभी को ग़मगीन कर गया।
11 दिसंबर 1937 के दिन अफगानिस्तान के काबुल में जन्में कादर खान ने करीब 46 साल तक हिंदी सिनेमा में काम किया और इस दौरान उन्होंने 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में तरह-तरह की भूमिकाएं निभाई। हालांकि, दर्शकों ने उन्हें सबसे ज्यादा कॉमिक रोल में ही पंसद किया। 90 के दशक में गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी को तो दर्शकों ने बेहिसाब प्यार दिया। भारतीय दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले कादर खान का परिवार 1938 में अफगानिस्तान से मुंबई आकर बस गया। तब कादर खान की उम्र महज एक वर्ष ही थी। उनके परिवार में उनके अलावा 3 और भाई थे। सभी शुरुआत में मुंबई के एक झोपड़पट्टी इलाके में रहते थे।
कादर खान ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के म्युनिसिपल स्कूल से पूरी करने के बाद इस्माइल यूसुफ कॉलेज से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग करने के बाद कादर खान सीधे फिल्मों में नहीं आए बल्कि अगले पांच सालों(1970-75) के दौरान उन्होंने मुंबई के नामचीन कॉलेजों में प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दी। हालांकि, इसी बीच उनके अभियन क्षमता से कायल होकर तब के सुपरस्टार दिलीप कुमार ने उन्हें दो फिल्मों के लिए साइन कर लिया था। दरअसल, कॉलेज में हुए वार्षिकोत्सव के दौरान एक नाटक में कादिर खान के अभियन को देखकर दिलीप साहब उनसे इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने नए-नवेले कादर खान को ‘सगीना महतो’ और ‘बैराग’ इन दो फिल्मों के लिए साइन कर लिया।
हालांकि, कादर खान की डेब्यू फिल्म ‘दाग’ रही, जिसमे उन्होंने साल 1973 में काम किया। इसके बाद अभिनय का जो उनका कारवां शुरू हुआ वो आगामी 46 साल तक अनवरत चलता चला गया और उनकी मौत के बाद ही थमा। 1981 में कादर खान ने नसीब फिल्म में काम किया था, जिसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, ऋषि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा थे। फिर 1982 में कादर खान ने वापिस अमिताभ के साथ ही एक और फिल्म सत्ते पे सत्ता भी की, जिसमें उनके साथ शक्ति कपूर और हेमा मालिनी भी थी। इसके बाद अगले साल 1983 में खान ने 4 फिल्मों में काम किया, जिनके नाम मव्वाली, जस्टिस चौधरी, जानी दोस्त और हिम्मतवाला थी, इनमे से 3 फ़िल्में जहाँ जीतेन्द्र और श्रीदेवी की थी, वहीँ एक फिल्म जानी दोस्त में धर्मेन्द्र और परवीन बाबी थी।
1984 में नया कदम, अंदर-बाहर, कैदी, अकल्मन्द, मकसद, तोहफा और इन्कलाब जैसी फिल्मों में काम किया। 1985 में कादर खान ने मासटरजी, सरफरोश, बलिदान, मेरा जवाब और पत्थर दिल में काम किया। 1986 में कादर खान की इंसाफ की आवाज़, दोस्ती दुश्मनी, घर-संसार, धर्म अधिकारी, सुहागन, आग और शोला जैसी फिल्मे आई, जबकि 1987 में उनकी हिम्मत और मेहनत, हिफाजत, वतन के रखवाले, सिन्दूर, खुदगर्ज, औलाद, मजाल, प्यार करके देखो, जवाब हम देंगे और अपने-अपने आई। फिर 1988 में इन्तेकाम, बीवी हो तो ऐसी, साज़िश, वक्त की आवाज़, घर-घर की कहानी, शेरनी, कब तक चुप रहूंगी, कसम, मुलजिम, दरिया दिल, प्यार मोहब्बत, सोने पे सुहागा थी. फिर 1989 में चालबाज़, कानून अपना-अपना, काला बाज़ार जैसी करनी वैसी भरनी, बिल्लो बादशाह, गैर कानूनी, वर्दी, हम भी इंसान हैं/ आदि फिल्मों में काम किया।
1990 में इन्होंने अपमान की आग, जवानी जिंदाबाद, मुक्कदर का बादशाह, घर हो तो ऐसा, किशन-कन्हैया, शानदार, बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी आदि फिल्मों में काम किया। 1991 में इनकी यारा दिलदार, साजन, इन्द्रजीत, क़र्ज़ चुकाना हैं, खून का क़र्ज़, हम, प्यार का देवता, मर दिल तेरे लिए आदि फिल्मे आई.1992 में इन्होंने अंगार, बोल राधा बोल, सूर्यवंशी, दौलत की जंग, कसक, नागिन और लूटेरे जबकि 1993 में शतरंज, तेरी पायल मेरे गीत, धनवान, औलाद के दुश्मन, दिल तेरा आशिक, रंग, गुरुदेव, दिल है बेताब, ज़ख्मों का हिसाब, कायदा कानों, आशिक आवारा, आँखें और दिल ही तो हैं जैसी फिल्मे की। 1994 में मिस्टर आज़ाद, घर की इज्ज़त, मैं खिलाडी तू अनाडी, आग, इना मीना डीका, आतिश, पहला पहला प्यार, साजन का घर, अंदाज, खुद्दार, राजा बाबु आदि फिल्मे की. 1995 में हलचल, कुली नम्बर 1 ताक़त, तकदीरवाला, अनोखा अंदाज़, दी डॉन, मैदान-ए-जंग, सुरक्षा, वर्तमान, ओह डार्लिंग! यह हैं इंडिया नाम की फिल्मों में काम किया।
1996 में कादर खान ने “साजन चले ससुराल”, छोटे सरकार, रंगबाज, सपूत, माहिर, बंदिश और एक था राजा में काम किया. 1997 में आपने शपथ, भाई, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, दीवाना मस्ताना, हमेशा, ज़मीर, बनारसी बाबु, सनम, जुदाई, हीरो नम्बर वन, जुड़वाँ की। फिर 1998 , में नसीब, कुदरत, हीरो हिन्दुस्तानी, बड़े मिया छोटे मिया, जाने जिगर, दुल्हे-राजा, घरवाली-बाहरवाली, हिटलर, आंटी नम्बर 1, मेरे दो अनमोल रतन की जबकि 1999 में जानवर, हिन्दुस्तान की कसम, हसीना मान जायेगी, सिर्फ तुम, राजाजी, अनाडी नम्बर 1 और आ अब लौट चले आदि फिल्में की। जबकि 2000 में तेरा जादू चल गया, धडकन, जोरू का गुलाम, क्रोध, आप जैसा कोई नहीं, कुंवारा जैसी फिल्मों में काम किया। 2001 में कादर खान की सिर्फ एक फिल्म आई जिसका नाम था इत्तेफाक जबकि 2002 में खान के करियर ने फिर से गति पकड़ी और उन्होंने जीना सिर्फ मेरे लिए, अंखियों से गोली मारे, बधाई हो बधाई, हाँ! मैंने भी प्यार किया है, चलो इश्क लड़ाए, वाह! तेरा क्या कहना नाम की फिल्मे की।
2003 में फंटूस, परवाना की जबकि 2004 में मुझसे शादी करोगी, सुनो ससुरजी और कौन हैं जो सपनों में आया नाम की फिल्मे की। 2005 में खान ने कोई मेरे दिल में हैं, लकी, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे में काम किया. जबकि 2006 में उमर, जिज्ञासा, फैमिली में कम किया, और 2007 में जहाँ जाइयेगा हमें पाइयेगा, ओल्ड इज गोल्ड और अंडर ट्रायल में कम किया। फिर 2008 में एक ही फिल्म आई महबूबा जबकि 2013 में “दीवाना मैं दीवाना आई” 2014 में ऊँगली तो 2015 में हो गया दिमाग का दही, लतीफ़ और इंटरनेशनल हीरो आई जबकि 2016 में अमन के फ़रिश्ते और 2017 में कादर खान की तबियत ख़राब होने के कारण कोई फिल्म नहीं आई। और फिल्मों से दूर होने के दो साल बाद कादर खान ने कनाडा के एक अस्पताल में अपनी अंतिम साँस ली और इस तरह उनके जीवन का सफर समाप्त हो गया।
चलिए नजर डालते हैं उनके फिल्मफेयर अवार्ड की तरफ:-
1982 में कादर खान को “मेरी आवाज़ सुनो”के लिए बेस्ट डाइलोग के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।
1991 में बाप नम्बरी बेटा 10 नम्बरी के लिए बेस्ट फिल्मफेयर कॉमेडियन का अवार्ड मिला था।
1993 में अंगार में बेस्ट डाइलोग के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।
इसके अलावा वो 1984 में हिम्मतवाला, 1986 में आज का दौर, 1990 में सिक्का, 1992 में हम, 1994 में आँखें, 1995 में मैं खिलाड़ी तू अनादी, 1996 में कुली नम्बरवन, 1997 में साजन चले ससुराल के लिए और 1999 में दुल्हे राज में बेस्ट कॉमेडी के लिए के लिए बेस्ट फिल्म फेयर अवार्ड में नामांकित किया गया।

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