कुलदीप नैयर: 95 साल की उम्र में टूट गया पत्रकारिता का ध्रुव तारा

हर इंडस्ट्री का एक सदाबहार चेहरा होता है, जैसे बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन है, राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी थे। उसी तरह भारतीय पत्रकारिता में भी एक ऐसा चेहरा था जो इस क्षेत्र में एक लंबे समय से किसी ध्रुव तारे की तरह चमक रहा था। बड़े दुःख और अफसोस की बात है कि यह तारा कल देर रात टूट गया। हम बात कर रहे हैं साल 2015 में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित भारतीय पत्रकारिता जगत का सबसे अहम चेहरा रहे पत्रकार कुलदीप नैयर की। जिनका कल देर रात दिल्ली के एक अस्पताल में 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
बताया जा रहा है कि तबियत खराब होने की वजह से उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह आईसीयू वार्ड में रखे गए थे। बढ़ती उम्र और काफी समय से सेहत खराब रहने के चलते बुधवार की रात करीब बारह बजे पत्रकार कुलदीप नैयर इस दुनिया को अलविदा कह गए। और अपने पीछे छोड़ गए अपनी कहीं और लिखी गई बातों का एक बेहद बृहद बरगद। जिसके नीचे बैठकर आज और आनेवाले कल की पीढ़ी पत्रकारिता की पढ़ाई करेगी। कुलदीप नैयर उन लोगों में से एक थे, जिन्होंने आपातकाल का खुलकर विरोध किया और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत जेल भी गए।  आज दोपहर एक बजे लोधी रोड पर स्थित घाट में कुलदीप नैयर का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पत्रकार के साथ-साथ लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता रहे कुलदीप नैयर की मौत कु खबर सुनकर समूचा राजनीतिक और पत्रकार समाज शोक में है।  कुलदीप नैयर के देहावसान पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में कहा, “एमरजेंसी के खिलाफ उनका कड़ा रुख, जनसेवा तथा बेहतर भारत के लिए उनकी प्रतिबद्धता को हमेशा याद रखा जाएगा…” वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीलाल ने दुख जताया और ट्वीट किया-“वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के निधन की बुरी खबर मिली. वह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लड़ाई के लिए याद किये जाएंगे. उनके निधन से राष्ट्र को बड़ी हानि हुई है।
वर्ष 1985 से कुलदीप नैयर तकरीबन 80 पत्र-पत्रिकाओं में 14 भाषाओं में कॉलम लिख चुके थे। इनमें बेंगलुरु का ‘डेक्कन हेरल्ड’, ‘द डेली स्टार’, ‘द संडे गार्जियन’, ‘द न्यूज़’, ‘द स्टेट्समैन’, ‘प्रभा साक्षी’ और पाकिस्तान के अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ और ‘डॉन प्रमुख’ हैं। इसके अलावा कुलदीप नैयर ‘बियॉन्ड द लाइंस’, ‘इंडिया आफ्टर नेहरू’, ‘डिस्टेंट नेबर्स: अ टेल आॅफ द सबकॉन्टिनेंट’, ‘वॉल ऐट वाघा – इंडिया पाकिस्तान रिलेशंस’, ‘सप्रेशन आॅफ जजेस’, ‘द जजमेंट: इन्साइड स्टोरी आॅफ इमरजेंसी इन इंडिया’, ‘विदाउट फीयर: द लाइफ एंड ट्रायल आॅफ भगत सिंह’ और ‘इमरजेंसी रिटोल्ड’ समेत तकरीबन 15 किताबें भी लिख चुके हैं। नैयर साहब ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार का संपादक रहने के साथ ही 1990 में ब्रिटेन स्थित भारतीय उच्चायोग में बतौर उच्चायुक्त अपनी सेवाएं भी दी थीं।
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