कौन सच्चा, कौन झूठा! अमेठी में इंडो-रशियन राइफल प्राइवेट लिमिटेड के उद्घाटन को लेकर जुबानी जंग

भारत एक ऐसा देश है जहां कोई काम अगर होता है या होने वाला होता है तो सबसे पहले क्रेडिट लेने की मारामारी शुरू हो जाती है। दिलचस्प तो यह है कि क़रीब 2 महीने बाद लोकसभा चुनाव होना है। ऐसे में हर राजनीतिक दल यही चाहता है कि अच्छे काम का क्रेडिट उसे मिल जाये ताकि आगामी चुनाव में वह उसी क्रेडिट के सहारे जनता को अपने प्रवचन सुना सके। खैर, चलिए बात करते हैं मुद्दे पर।

अमेठी में इंडो-रशियन राइफल प्राइवेट लिमिटेड के उद्घाटन को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि मोदी ने फिर झूठ बोला, अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का 2010 में मैंने ही उद्घाटन किया था। वहीं, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने राहुल के इस दावे को ही गलत बता दिया। उन्होंने फोटो शेयर करते हुए ट्वीट किया, राहुल 2007 में शिलान्यास के वक्त मौजूद थे, लेकिन वे कह रहे हैं कि 2010 में शिलान्यास किया।

जानिए क्या है वह ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री और उसमें तैयार होने वाला AK-203/103 राइफल

AK-203/103 राइफल जल्द ही अमेठी के कोरवा क्षेत्र में निर्मित की जाएगी। रविवार, 3 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेठी में इस विनिर्माण इकाई की आधारशिला रखी है। AK-203/103 राइफल लीजेंडरी AK-47 राइफल की नवीनतम व्युत्पन्न(derivative) है।

यह परियोजना रूस के सहयोग से कोरवा आयुध कारखाने ( Korwa ordnance factory ) में शुरू की जाएगी। इसे साल 2010 में स्थापित किया गया था। AK-47 के नवीनतम संस्करण की लगभग 7.5 लाख इकाइयां नई इकाई में निर्मित की जाएंगी।

ये राइफलें उत्तरोत्तर सेना की इन-सर्विस इंसास ( INSAS ) और AK-47 राइफलों की जगह लेंगी। AK राइफल्स की 200-series AK की 100-series की अगली पीढ़ी और विकास का प्रतिनिधित्व करती है।

200-series कलाश्निकोव राइफल्स ( Kalashnikov rifles ) में एक ही तरह के मूल डिजाइन, लेआउट और प्रमुख विशेषताएं हैं। इनमें प्रसिद्ध विश्वसनीयता और स्थायित्व शामिल हैं। लेकिन फ़ीचर में एर्गोनॉमिक्स (ergonomics) और आधुनिक सहायक इंटरफेस शामिल हैं।

AK103 में प्लास्टिक फोल्डिंग बटस्टॉक है जो परिवहन और लैंडिंग संचालन के दौरान मार्च पर सुविधा सुनिश्चित करता है। हथियार मुड़े हुए बटस्टॉक के साथ फायर कर सकता है। कलाश्निकोव (Kalashnikov) वेबसाइट के अनुसार, AK103 एक 40 मिमी अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर या एक चाकू-किरच (knife-bayonet) कैरी कर सकता है।

माना जाता है कि दुनिया भर में 100 से अधिक देशों के सेना के जवान इस राइफल से सुसज्जित हैं। सैन्य समर्थन और सभी परिस्थितियों में प्रभावी परिचालन के साथ-साथ AK-47 राइफल की विश्वसनीयता और परिचालन सुगमता के कारण इसकी बहुत अधिक मांग हैै।

भारत और रूस के बीच नया संयुक्त उद्यम (joint venture) पिछले साल S-400 Triumf एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के लिए 5.43 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद आया है।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रक्षा बलों को राइफल की आपूर्ति होने के बाद सरकार अगले चरण में अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस बल को यह राइफल उपलब्ध कराएगी।

पिछले हफ्ते, रक्षा मंत्रालय ने 73,000 असॉल्ट राइफल की आपूर्ति के लिए अमेरिकी फर्म सिग सॉयर (Sig Sauer) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इन राइफलों का उपयोग चीन से लगती लगभग 3,600 किलोमीटर की सीमा पर तैनात सैनिकों द्वारा किया जाएगा।

~Shravan Pandey

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