क्या दलितों द्वारा बार-बार इस्लाम अपना लेने की धमकी जायज है?

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ओरिएंटल न्यूज़ वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक़, दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने इस्लाम धर्म अपना लेने की धमकी दी है। जिग्नेश ने कहा है कि मोदी दलितों से माफ़ी मांगें वरना हम इस्लाम धर्म अपना लेंगे। आपको बता दें कि आये दिन एससी/एसटी(SC/ST) को लेकर देश में दंगे फसाद हो रहे हैं। हालिया घटना पर नजर डालें तो राजस्थान के हिंडोन जिले में लोगों ने दलित नेताओं के यहाँ आग लगा दी थी। इस घटना से क्रोधित दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली धमकी दी है। मेवानी का कहना है कि मोदी को दलितों से माफ़ी मांगनी होगी वरना हम इस्लाम धर्म कबूल कर लेंगे। अगर यह रिपोर्ट वाकई में सच है तो यह समाज के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि जिग्नेश मेवानी गुजरात में हुए ऊना कांड के बाद सुर्खियों में आये थे। गुजरात के ऊना में गाय की चमड़ी उधेड़ने के शक में कुछ दबंगों ने दलित को गाड़ी में बांधकर पट्टे से पिटाई की थी। इस घटना को लेकर जिग्नेश मेवानी ने सड़क पर उतर आंदोलन किया था। इसी वजह से दलितों ने जिग्नेश पर भरोसा दिखाते हुए अपना समर्थन दिया। उसके बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव के रणक्षेत्र में उतरे मेवानी को जनता का भरपूर समर्थन मिला और वह विधायक बनकर आये।

अब जब जनता ने मेवानी को अपने विकास और हितों को ध्यान में रखते हुए चुना था तब मेवानी का फर्ज था कि वह जनता की समस्याओं को सुने और दूर करें। मगर यहाँ सब कुछ इसके उलट हो रहा है। बजाय काम करने के मेवानी इधर उधर घूमकर बयानबाजी में मशगूल हैं। धर्म परिवर्तन को लेकर जिग्नेश मेवानी की सोच से उनकी राजनीतिक स्थिति में बदलाव तो आ सकता है मगर उनके समाज में मौजूद परेशानियां दूर नहीं हो सकती।

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