खतना के खिलाफ दायर याचिका पर SC ने कहा,”महिलाओं को अपने ‘शरीर पर नियंत्रण’ का अधिकार”

इतिहास गवाह है कि धर्म की दुहाई देकर सबसे ज्यादा शोषण महिलाओं का किया गया है। फिर चाहे वो दुनिया का कोई भी धर्म हो। सबने प्रथा और परंपरा के प्रपंच के नाम पर आदिकाल से महिलाओं को प्रताड़ित करने का काम किया है। सती प्रथा, देवदासी प्रथा, तीन तलाक, खतना सरीखे प्रथा के नाम पर धर्म ने महिलाओं को खूब प्रताड़ित किया। लेकिन गनीमत है कि संविधानिक संस्थाओ के उदय के बाद धर्म की जंजीरों में जकड़ी महिलाओं को देर सवेर इनसे छुटकारा मिलता गया।

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हालिया उदाहरण मुस्लिम महिलाओं के साथ ‘तीन तलाक’ के नाम पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये जिस फैसले के बाद यह धार्मिक प्रथा कानूनन अपराध बन गया है। अब ताजा मामला खतना जैसी खतरनाक और अमानवीय प्रथा से जुड़ा है। दरअसल मुस्लिम महिलाओं के खतने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल किया गया है। रिट याचिका के तहत याचिकाकर्ता ने मांग की गई है कि मुस्लिम महिलाओं के खतने पर देश में पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगे और इसे एक गैर-संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए।

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खतना को लेकर दायर इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने बयान से यह साफ कर दिया कि खतना जैसी खतरनाक प्रथा को लेकर कानून का क्या दृष्टिकोण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के अस्तित्व को हम सिर्फ ‘मां और पत्नी’ इन दो भूमिकाओं में ही नही बांध सकते। महिलाओं की जिंदगी सिर्फ पति और बच्चों के लिए ही नहीं है। महिलाओं को अपनी मर्जी से उनकी अपनी इच्छाओं को पूरा करने का पूरा अधिकार है। पति के प्रति समर्पण ही महिला का कर्तव्य नहीं है। किसी भी समाज में ऐसी रुढियों का चलन किसी की व्यक्तिगत गोपनियता का उल्लंघन है।

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आपकों बता दें कि महिलाओं के जननांग में क्लिटोरिस नामक एक अंग होता है। यह अंग महिलाओं की सेक्शुएलटी से जुड़ा होता है। क्लिटोरिस की इंटरकोर्स के दौरान महिलाओं की संतुष्टि के लिए काफी अहमियत होती है। लेकिन बोहरा मुस्लिम समुदाय में खतने की प्रक्रिया के दौरान क्लिटोरिस को काटकर अलग कर दिया जाता है। खतना करने का काम बाल्यावस्था में ही किया जाता है। खतना करने के लिए कई बार इतनी दर्दनाक और खतरनाक विधि का इत्सेमाल किया जाता है कि बच्चियां खतने के दर्द को नहीं सह पातीं और अत्यधिक खून बह जाने की वजह से उनकी सेहत के लिए गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इन्हीं कारणों के चलते अब महिलाओं के खतने के विरोध में आवाजें उठ रही हैं।

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