‘ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया’~ दाग देहलवी

दिल्ली में 25 मई 1831 को मशहूर शायर दाग देहलवी का जन्म हुआ था। दिल्ली में जन्मे मशहूर शायर दाग देहलवी का असली नाम नवाब मिर्जा खाँ था। ‘दाग़’ नाम उन्होंने अपने भीतर के शायर के लिए चुना। इसके पीछे की कहानी यह है कि देहलवी साहब का यह मानना था कि हर आदमी के जीवन में कोई न कोई दाग होता हैं। उनके जीवन में वह दाग उनकी प्रेमिका ने उनके इश्क को ठुकराकर उनके दिल को दिया था। देहलवी का भी अपना मतलब हैं। देहलवी का मतलब होता है दिल्ली का या दिल्लीवाला, इसे उन्होंने अपना तखल्लुस बनाया। अपने जीवनकाल में जो ख्याति, प्रतिष्ठा और शानो-शौकत प्राप्त हुई, वह किसी बड़े-से-बड़े शायर को अपनी ज़िन्दगी में मयस्सर न हुई। आइए आज ऐसे महान शख्सियत के जन्मदिन पर उनकी बेहतरीन गजलों में से एक को पढकर उन्हें याद करते हैं। 

 
ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया


ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया
झूट सच आज़मा के देख लिया

 

उन के घर ‘दाग़’ जा के देख लिया
दिल के कहने में आ के देख लिया

कितनी फ़रहत-फ़ज़ा थी बू-ए-वफ़ा
उस ने दिल को जला के देख लिया

कभी ग़श में रहा शब-ए-व’अदा
कभी गर्दन उठा के देख लिया

जिंस-ए-दिल है ये वो नहीं सौदा
हर जगह से मँगा के देख लिया

लोग कहते हैं चुप लगी है तुझे
हाल-ए-दिल भी सुना के देख लिया

जाओ भी क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा
बार-हा आज़मा के देख लिया

ज़ख़्म-ए-दिल में नहीं है क़तरा-ए-ख़ूँ
ख़ूब हम ने दिखा के देख लिया

इधर आईना है उधर दिल है
जिस को चाहा उठा के देख लिया

उन को ख़ल्वत-सरा में बे-पर्दा
साफ़ मैदान पा के देख लिया

उस ने सुब्ह-ए-शब-ए-विसाल मुझे
जाते जाते भी आ के देख लिया

तुम को है वस्ल-ए-ग़ैर से इंकार
और जो हम ने आ के देख लिया

‘दाग़’ ने ख़ूब आशिक़ी का मज़ा
जल के देखा जला के देख लिया

~दाग़ देहलवी
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