गाय के गोबर से बनेंगे पेपर प्लांट, होगी लाखों की कमाई

गोबर। यह एक शब्द नहीं बल्कि पूरा का पूरा वाक्य है। यह वाक्य उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो समाजिक दृष्टी से बेकार और नाकारा माने जाते है। जैसे अगर कोई व्यक्ति किसी काम का नहीं होता है, तो लोग उसे गोबर आदमी कहते है। लेकिन, यह भूल जाते है कि गोबर बेकार नहीं बल्कि उसका बहुत बड़ा कारोबार है। पहले के समय गोबर का उपयोग खेतों में खाद और चूल्हों में जलावन के रूप में ही होता था। लेकिन आज जब हम तकनीक में इतना आगे निकल गए हैं, तब गोबर के इस्तेमाल से हर नए दिन कुछ न कुछ नई चीज बनने की खबर आती रहती है।
Image result for गाय के गोबर से कागजइसी क्रम में सरकार ने अब गोबर के इस्तेमाल से कागज बनाने का इस्तेमाल किया है। गोबर से पेपर बनाने का सफल प्रयोग करने के बाद एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाले खादी ग्रामोद्योग (केवीआईसी) की यूनिट केएनएचपीआई ने तो गाय के गोबर (cowdung) से कागज का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अब देश भर में इस प्रकार के प्लांट लगाने की योजना तैयार की जा रही है। कागज बनाने के लिए गोबर के साथ कागज के चिथड़े का इस्तेमाल किया जाता है।
Image result for गाय के गोबर से कागजकेवीआईसी के चेयरमैन वी.के. सक्सेना ने बताया कि गोबर से कागज बनाने के साथ वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोबर में से कागज बनाने लायक सिर्फ 7 फीसदी मैटेरियल निकलते हैं। बाकी के 93 फीसदी का इस्तेमाल वेजिटेबल डाई बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। ये वेजिटेबल डाई पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इसका निर्यात भी किया जा सकता है। सक्सेना के दावों को माने, तो यह स्कीम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लाई जा रही है। गोबर से कागज बनाने वाले प्लांट लगाने में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। एक प्लांट से एक माह में 1 लाख कागज के बैग बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा वेजिटेबल डाई अलग।
Image result for गाय के गोबर से कागजउन्होंने बताया कि कागज एवं विजिटेबल डाई बनाने के लिए सरकार 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी। एक जानवर एक दिन में 8-10 किलोग्राम गोबर करता है। ऐसे में, किसानों को अपनी मवेशियों से रोजाना कम से कम 50 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। सक्सेना ने बताया कि इस प्रकार के प्लांट देश भर में लगाने की योजना है। निजी लोगों को इस प्रकार के प्लांट लगाने के लिए सरकार की तरफ से कर्ज मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि केवीआईसी ने इस टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण कर लिया है और केवीआईसी लोगों को टेक्नोलॉजी देने का काम करेगा। उन्होंने बताया कि केवीआईसी के जयपुर स्थित केएनएचपीआई प्लांट में अगले 15-20 दिनों में गोबर से कागज बनाने का काम आरंभ हो जाएगा।
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