गौसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली जर्मन महिला को Padma Shri

70वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक जर्मन महिला को Padma Shri अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। गौसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने के कारण इस महिला को पद्म श्री ( Padma Shri ) सम्मान से अलंकृत किया गया। 61 वर्षीय इस महिला का नाम Friederike Irina Bruning है। इस कहानी की शुरुआत होती है लगभग 25 साल पहले। भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर गाय को लेकर राजनीतिक गलियारे में सरगर्मियां तेज रहती हैं। ऐसे में एक विदेशी महिला का भारत में आना और गौसेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देना भारतीय राजनेताओं के लिए एक सीख है।

25 साल पहले जर्मनी से एक महिला Friederike Irina Bruning पहली बार भारत आयीं। वह उत्तर प्रदेश के मथुरा घूमने गयी थीं। उन्होंने वहां छुट्टे गायों की दुर्दशा देखी। इससे उनकी भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने वहीँ रुकने और उन गायों की सेवा करने का फैसला किया। इस गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत सरकार ने उनके इस सेवा भाव को सम्मान देते हुए उन्हें पद्म श्री ( Padma Shri ) से सम्मानित किया।

गौसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली जर्मन महिला को Padma Shri

सार्वजनिक चकाचौंध से दूर मंदिर की नगरी के एक निर्जन स्थान में Friederike Irina Bruning 1800 से अधिक गाय और बछड़े रखी हुई हैं। Friederike Irina Bruning यह सब पिछले 25 सालों से कर रही हैं। इस गौशाला में ज्यादातर वे पशु हैं जिन्हे उनके मालिकों ने त्याग दिया था। इनको उस इलाके में सुदेवी माताजी के नाम से जाना जाता है। सुदेवी ने पद्म श्री से सम्मानित किये जाने के बाद सरकार का आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि इससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी और वे पशुओं के प्रति दया का भाव रखेंगे।

Friederike Irina Bruning का दावा है कि उनके गौशाला में करीब 60 वर्कर हैं। उन्होंने इन वर्करों की सैलेरी, अनाज और दवा पर प्रति महीने 35 लाख रूपया खर्च किया है। उनका कहना है कि विरासत में मिली संपत्ति से उन्हें हर महीने करीब 6-7 लाख रूपया मिलता है। Friederike Irina Bruning ने इसकी शुरुआत राधाकुंड में एक छोटे से कोर्टयार्ड से की थी। उसके बाद इसे एक गौशाला बनाया गया जिसे सुरभी गौशाला निकेतन कहा जाता है। उन्होंने अपने माता-पिता के पैसे का इस्तेमाल गौशाला सेट अप करने में कर डाला है। Friederike Irina Bruning ने अंधे या घायल बोविन्स जिनको स्पेशल ट्रीटमेंट की आवश्यकता है, के लिए अलग अहाता बनाया हुआ है। जर्मनी की इस महिला को भारत सरक़ार से बस एक ही उम्मीद है कि वह लॉन्ग टर्म वीज़ा या इंडियन सिटिजनशिप दे ताकि मुझे हर साल वीज़ा रिन्यूअल की जरुरत न पड़े।

uvayu.com जर्मनी की इस महिला Friederike Irina Bruning के सेवा भाव की प्रसंशा करता है। हम उम्मीद करते हैं कि उनके इस सेवा भाव से और भी लोग प्रभावित होंगे और जीवों के प्रति दया भाव दिखाएंगे। Friederike Irina Bruning को पद्म श्री मिलने पर ढेर सारी शुभकामनायें।

~Shravan Pandey

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