ग्रामीण भारत में बेटियों संग होने वाले भेदभाव की भयावह तस्वीर दिखाती है. I Am Banni – Daughter Of Kutch

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दुनिया जैसी है हम उसे वैसे नहीं देखते बल्कि हम जैसे हैं वैसे दुनिया को देखते हैं। यही कारण है कि हम जैसे मेट्रो शहर में रहने वाले लोग इस भ्रम में रहते हैं कि दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है और इस बढ़ती दुनिया के साथ महिलाओं के जीवन में भी बदलाव आ गए है। निदेशक नीतिन चौधरी अपनी आगामी फिल्म I Am Banni – Daughter Of Kutch के जरिए भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बदतर स्थिति को पर्दे पर उतारकर शहरी लोगों के उपर्युक्त भ्रम को तोड़ने और उन्हें ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार की भयावह हकीकत से रूबरू कराने जा रहे हैं।

I Am Banni

वर्तमान भारत सरकार द्वारा शुरू किये गए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना को प्रमोट करती I Am Banni – Daughter Of Kutch की कहानी ग्रामीण इलाकों में बेटियों की शिक्षा जैसे मौलिक अधिकारों के हनन और उस अधिकार के लिए फ़िल्म की नायिका द्वारा किये गए संघर्ष की कहानी है। आर जी मूवीज़ के बैनर तले बन रही है इस फ़िल्म को आनिल गर्ग, राहुल और गौरव गर्ग द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। फ़िल्म के कहानीकार के के मख़्वाना है और निर्देशन का जिम्मा नीतिन चौधरी ने संभाला है। वहीं फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रोशनी वालिया और गौरव गर्ग नज़र आ रहे हैं।

Koप्रोड्यूस अनिल गर्ग अपनी इस फ़िल्म के उद्देश्य को लेकर बात करते हुए बताते है कि I Am Banni – Daughter Of Kutch की कहानी सत्य घटना से प्रेरित है। इस फ़िल्म के जरिए वह समाज में यह संदेश देना चाहते है कि लड़कियां किसी भी मामले में लड़कों से कमतर नहीं है। उन्होंने बताया कि लड़कियों को शिक्षित करने के नजरिए को लेकर शहरों और ग्रामीण इलाकों में आसमान जमीन का फर्क है। और इस फ़िल्म के जरिए वह इसी फर्क को उज़ागर करने और पाटने का काम कर रहे हैं। वह चाहते है कि लड़कियों को शिक्षित करने के लिए जितने प्रयास शहरों में किए जाते हैं उतने ही ग्रामीण इलाकों में भी किये जाए।

I Am Banni movie

फ़िल्म की कहानी के बारे में विस्तार से बताते हुए फ़िल्म के लेखक के के मख़्वाना कहते है कि I Am Banni – Daughter Of Kutch फ़िल्म की कहानी गुजरात के भुज इलाक़े में रहने वाली एक ऐसे लड़की की है, जो उस इलाके में लड़कियों के साथ किए जाने वाले भेदभाव के खिलाफ विरोध की आवाज को बुलंद करती है। लड़कियों को शिक्षित करने की उसकी इस लड़ाई में उसका साथ इंग्लैंड से आए उसके कुछ दोस्त देते हैं। किसी की भी स्थिति को बदलने में शिक्षा सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। इसलिए फ़िल्म की नायिका बन्नी भी गांव की लड़कियों को शिक्षित करने के उद्देश्य से गांव के बंद पड़े स्कूल को दोबारा शुरू करने के लिए गांव के सरपंच के बेटे से भिड़ जाती है।

तो इनक्रेडिबल इंडिया के ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की बदतर स्थिति को हम सभी के सामने लाने का काम करने जा रही फिल्म I Am Banni – Daughter Of Kutch हर उस शख़्स को जरूर देखनी चाहिए, जो अपने घर से लेकर ऑफिस तक के दायरे को ही अपनी दुनिया समझकर इस भ्रम में जी रहा है कि भारत ने बहुत ज्यादा तरक्की कर ली है। और अब लैंगिक भेदभाव(जेंडर डिस्क्रिमिनेशन) जैसी कोई चीज़ एक्सिस्ट ही नहीं करती। ग्रामीण भारत यानी असली भारत में महिलाओं की असली तस्वीर सामने रखती 120 मिनट लंबी यह फ़िल्म I Am Banni – Daughter आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में 18 जनवरी को प्रदर्शित होगी।

– रोशन ‘सास्तिक’

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