चलकर इन्सानियत के रास्ते पर ग़ैरों को भी इन्सान बना

छोड़ दामन ऐयाशी आवारापन जग में अपनी पहचान बना
चलकर जिस रास्ते पर अब तक मिली न तुझको पहचान कभी
छोड़ दे साया अतीत आवारापन कर कुछ गजब आगाज़ अभी
सुनते रहे नित गली में अपनें तुम जालिम आवारा बदनाम हो
तुम कह अलविदा आवारापन बस तुम ही तो इन्सान हो
कोशिश करके देख ले वन्दे हर मुश्किल पे विजय तू पायेगा
छोड़ आवारापन की ज़िन्दगी जग में नाम कमायेगा

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