चीन का चमत्कार: सरकारी न्यूज चैनल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने न्यूज एंकर ने पढ़ी खबर

एक समय था, जब हम देश-दुनिया की खबरों से हम जमीनी स्तर पर काम करने वाले रिपोर्ट्स के जरिए रूबरू होते थे। लेकिन फिर देखते-ही-देखते समय बदला और न्यूज़ चैनलों में रिपोर्टर की बजाय सुबह से शाम तक एंकर-ही-एंकर नजर आने लगे। सुबह से शाम तक सभी न्यूज चैनलों पर ज़्यादातर समय एंकर्स को ही देखते-देखते हम उनके आदी भी हो गए और सबके अपने-अपने पसंदीदा एंकर्स भी बन गए। और लोग खबर के अनुसार एंकर की बजाय एंकर के अनुसार खबर देखने और सुनने लग गए।
अब रिपोर्ट्स को टीवी स्क्रीन से गायब कर न्यूज़ चैनल्स के जो एंकर एक लंबे समय से टीवी पर छाए हुए हैं, उन एंकर्स के अस्तित्व पर भी खतरे की आहट सुनाई देने लगी है।इस नए बदलाव श्री गणेश चीन के प्रायोगिक रूप से हो गया है। जी हां,चीन के सरकारी न्यूज़ चैनल ने अपने स्टूडियों में एक ऐसा वर्चुअल न्यूज़ एंकर उतार दिया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से न्यूज़ पढ़कर सुना रहा है। शिंहुआ न्यूज़ एजेंसी का यह दावा है कि ये न्यूज प्रेजेंटर ठीक उसी तरह खबरें पढ़ सकते हैं, जिस तरह से प्रोफेशनल न्यूज रीडर खबरें पढ़ते हैं।
Image result for आर्टिफिशियल न्यूज एंकरचीन के साथ-साथ सारी दुनिया तब हैरत में पड़ गई, जब वर्चुअल एंकर ने अपने पहले न्यूज प्रोग्राम की शुरुआत- “हैलो, आप देख रहे हैं इंग्लिश न्यूज़ प्रोग्राम” कहकर की। अपने पहले वीडियो में वर्चुअल प्रेज़ेंटर कहता है “मैं आपकी जानकारी बनाए रखने के लिए लगातार काम करूंगा क्योंकि मेरे सामने लगातार टेक्स्ट टाइप होते रहेंगे। मैं आप तक सूचनाओं को एक बिल्कुल नए तरीक़े से पेश करने वाला अनुभव लेकर आऊंगा।” वर्चुअल एंकर का दूसरा वर्जन भी है जो चीनी भाषा में है।
Image result for आर्टिफिशियल न्यूज एंकरसोगो(चीन में मौजूद सर्च इंजन) का इस सिस्टम को तैयार करने में अहम योगदान रहा है। सोगो के दावों के अनुसार उनका वर्चुअल एंकर हर उस काम को पूरी दक्षता और बारीकी से करने में सक्षम है, जो खबर पढ़ते वक्त सामान्य एंकर करते हैं। हालांकि, सोगो के दावे और विशेषज्ञों की राय में बहुत बड़ा अंतर है।जिसे आम आदमी भी महसूस सकता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मिशेल वूल्ड्रिज का कहना है कि इन प्रेजेंटर्स के लिए यह काफी मुश्किल है कि वो खबर पढ़ते वक्त बिल्कुल नेचुरल नजर आए। इन्हें कुछ मिनट से ज्यादा देर तक देख पाना संभव नहीं है। उनके चेहरे पर कोई भाव-भंगिमाएं नहीं नजर आती हैं, न कोई लय। सबकुछ बेहद सपाट।
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