चीन के विरोध में ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा #BoycottChineseProducts

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जब जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था तब उम्मीदें थीं कि चीन जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट के रूप में नामित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के कदम को नहीं रोकेगा। मगर, चीन ने आतंक के समर्थन में ही कदम उठाया। हालांकि, तालिबान से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की समग्र सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चीन को अजहर की जरूरत है, क्योंकि यह कई स्थानों से होकर गुजरता है जो जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ है।

जैसा कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, यह लगभग वैसा ही है जैसे भारत अभी भी अजहर को मुक्त करने और 1950 में यूएनएससी (UNSC) सीट चीन को सौंपने की कीमत चुका रहा है।

आतंकी हमले के मास्टरमाइंड की चालों को प्रतिबंधित करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वर्षों से भारत उसे वैश्विक आतंकवादी नामित करने की कोशिश कर रहा है। 2009 में प्रयास शुरू हुए। 2016 में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने अजहर पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों में हाथ मिलाया।

चीन ने भारत की सुरक्षा के लिए सहानुभूति की कमी और अवहेलना का प्रदर्शन किया और अजहर को फिर से मुक्त कर दिया। नाराज भारतीय डोकलाम जैसे बहिष्कार वाले कदम को फिर से उठाना चाहते हैं। ट्विटर पर #BoycottChineseProducts की बाढ़ सी आ गई है और इस बार भी कोई इसे हल्के में नहीं ले रहा है। लगभग सभी सोशल मीडिया उपयोगकर्ता इस बात से सहमत हैं कि चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करना पीले रंग की विशाल अर्थव्यवस्था पर प्रहार करने और उन्हें सबक सिखाने का सबसे अच्छा तरीका होगा।

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