जब गांव वालों ने कहा ‘अछूत’ तब विधायक ने दिया भीख मांगने वाली महिला की अर्थी को कंधा

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जब गांव वालों ने कहा ‘अछूत’ तब विधायक ने दिया भीख मांगने वाली महिला की अर्थी को कंधा
पब्लिक फोरम की डिबेट्स में हम बड़ी-बड़ी हांकते है कि ‘जाति व्यवस्था’ यह गुजरे जमाने की बात हो गई है। लेकिन अगर हम हाल में ही गुजरे पिछली कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो समझ आएगा कि असल हकीकत क्या है। अभी कल ही हमनें आपको बताया था कि कैसे एक व्यक्ति को अपनी साली की लाश इसलिए सायकिल पर लादकर ले जानी पड़ी क्योंकि गांव वालों ने उसकी मदद करने वालों के समाजिक बहिष्कार की धमकी दे रखी थी। कुछ इसी तरह का एक मामला ओडिशा के ही झारसुगुड़ा से सामने आया है।
यहां एक औरत के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए गांव वाले इसलिए तैयार नही हुए क्योंकि वह औरत कथित रूप से नीच जाति की थी। मृतक महिला का देवर भी आर्थिक रूप से इतना दयनीय था कि अपनी भाभी का अंतिम संस्कार तक कराने में असमर्थ था। ऐसे बेहद ही मार्मिक क्षण में इलाके के विधायक मसीहा और मिसाल के रूप में सामने आए। जब किसी ने मृतक महिला के अंतिम संस्कार में मदद नही की, तब एक दिन बाद स्वयं बीजेडी विधायक रमेश पटुआ ने अपने स्तर पर मदद कर किसी तरह महिला का अंतिम संस्कार कराया।

झारसुगुड़ा के अमनापाली गांव की इस घटना के दो चेहरे है पहला गांव वालों का वह क्रूर चेहरा जो मृतक महिला के साथ भी जातिगत भेदभाव रखता है। और दूसरा वह चेहरा जो हमारे इस भ्रम को तोड़ता है कि सारे नेता बुरे होते है। 46 वर्षीय बीजेडी विधायक रमेश पटुआ का एक मृतक महिला के अर्थी को ऐसे वक्त में कंधा देना जब सारा गांव उससे मुंह फेर चुका हो, काबिलेतारीफ है। उनके इस कदम से ना सिर्फ बाकी नेताओं को प्रेरणा मिलेगी बल्कि जातिगत भेदभाव करने वालें लोगों को थोड़ी-बहुत शर्म भी आ जाएगी। अक्ल का आना थोड़ा मुश्किल लगता है।
दरअसल, भीख मांगकर अपना गुजारा करने वाली मृतक महिला गांव से अलग एक छोटी-सी झोपड़ी में अपने देवर के साथ रहती थी। दोनों के क़ाय दिनों से बीमार रहने के चलते उसके घर की माली हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। इसी बीच जब महिला की मृत्यु हो गई, तब उसके देवर के पास इतने भी पैसे नही थे कि अपनी भाभी का अंतिम संस्कार करा सके। ऐसे समय में गांव वालों ने आर्थिक मदद तो दूर जाति से बहिष्कार के डर से गैर जाति की मृतक महिला के अंतिम संस्कार तक मे शामिल होने से मना कर दिया। और ऐसे समय में विधायक रमेश पटुआ ने अपने बेटे और भतीजे की मदद से महिला का अंतिम संस्कार कराया। जब गांव वालों ने कहा ‘अछूत’ तब विधायक ने दिया भीख मांगने वाली महिला की अर्थी को कंधा

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