जब बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी गेंद पर धोनी ने दिलाई अविश्वसनीय जीत

आज के ही दिन साल 2016 में टी-20 विश्वकप में भारत और बांग्लादेश के बीच नॉकआउट मुकाबला खेला गया था। इस मुकाबले में जीत हासिल कर वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में प्रवेश करने के लिए बांग्लादेश को आखिरी ओवर में मात्र 11 रनों की जरूरत थी। सांसे रोक देने वाले उस रोमांचक अंतिम ओवर के दूसरे और तीसरे गेंद पर एक के बाद एक पड़े दो चौंको ने मैच को लगभग बांग्लादेश के नाम कर ही दिया था। तीन गेंदों पर जीत के लिए 2 रनों की दरकार महज औपचारिकता भर नजर आ रही थी।

बांग्लादेश

लेकिन इसके बाद अगली तीन गेंदों पर खेल ने इतने नाटकीय अंदाज में करवट बदली की इसने क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मैच में अपना नाम दर्ज करा लिया। सभी को लगा कि दो गेंदों पर दो चौके लगा चुके मुशफिकुर रहीम मैच को चौथी ही गेंद पर एक बड़ा शॉट लगाकर खत्म कर देंगे। लेकिन ओवर की चौथी गेंद पर पांड्या ने रहीम को पवेलियन भेज मैच को दिलचस्प बना दिया। बावजूद इसके बांग्लादेश के लिए जीत अब भी बेहद आसान थी। उसे मैच जीतने के लिए आखिरी 2 गेंदों पर केवल 2 रनों की आवश्यकता थी।

धोनी

इस बात की प्रबल आशंका थी कि मैच के पांचवी गेंद पर बांग्लादेश 2007 विश्वकप की तरह एक बार फिर बड़े मुकाबले में भारत को हराकर विश्वकप 2011 से बाहर कर देगा। लेकिन जब पांचवी गेंद पर भी बड़ा शॉट मारने के चक्कर में महमुदुल्लाह अपना विकेट गवां बैठे तब भारत के साथ-साथ बांग्लादेश की भी सांसे अटक गई। क्योंकि अब मुकाबला बराबरी का हो गया था।

आखिरी गेंद पर बांग्लादेश को जीत के लिए चाहिए थे दो रन और भारत को विकेट या फिर डॉट बाल। पांड्या ने जैसे-जैसे ओवर की आखिरी और निर्णायक गेंद डालने के लिए दौड़ लगाई वैसे-वैसे भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट प्रेमियों के दिल की धड़कने भी बढ़ने लगी। पांड्या की शार्ट लेंथ गेंद पर शुवगता ने जोरदार प्रहार करने का प्रयास किया लेकिन वह अपने प्रयास को परिणाम में तब्दील करने में नाकामयाब रहे।

इंडियन क्रिकेट टीम

अब जब जीत की उम्मीद खत्म हो गई तब मैच को ड्रा करने के उद्देश्य से बांग्लादेश के खिलाड़ी गेंद के छूटते ही एक रन के लिए दौड़ पड़े। लेकिन बांग्लादेशी खिलाड़ियों की दौड़ पर भारतीय विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी की चपलता भारी पड़ी। रहमान के क्रीज पर पहुंचने से पहले ही धोनी ने बिजली की तेजी से विकेट की गिल्लियां बिखेर कर बांग्लादेश के जीत के सपनों को बिखेर कर रख दिया। एक समय जो बांग्लादेश मैच को लगभग अपनी मुट्ठी में कर चुका था वह अंत में उसे ड्रा तक कराने में असफल रहा ।

वैसे इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया था कि क्यों क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है। यह मैच हमें हाल ही में निदहास ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए रोमांचक मैच की याद दिला देता है। इसमें भी एक विकेटकीपर दिनेश कार्तिक ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर हार को जीत में तब्दील कर दिया था।

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