जज़्बे को सलाम, एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स में 30 वर्षीय गोमती ने देश को दिलाया पहला गोल्ड

असली विजेता वही, जो बुरे हालात को हरा दे। भारत की इस बेटी ने जो कर दिखाया वह उतना आसान नहीं था जितना सुनने में लग रहा है। बुरे हालातों को हराते हुए 30 वर्षीय गोमती मरीमुथु ने देश को सोने का ताज पहना दिया। गोमती ने दोहा में चल रहे एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स ( Asian Athletics Championships ) में भारत को इसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया है। गोमती का यह मात्र तीसरा इंटरनेशनल इवेंट है।

गोमती ने महिलाओं की 800 मीटर रेस में शीर्ष स्थान हासिल किया। ऐसा पहली बार हुआ है जब गोमती ने किसी मेजर टूर्नामेंट में टॉप स्पॉट सिक्योर किया है। एग्रीकल्चरल बैकग्राउंड से आने वाली गोमती के लिए जिंदगी का यह सफ़र इतना आसान नहीं था। वह अपने भाई बहनों में इकलौती थी जो कॉलेज गई। गोमती इसके बदले अपने परिवार को कुछ देना चाहती थी।

आखिरकार, गोमती को बेंगलुरु में इनकम टैक्स जॉब मिल गया और रेगुलर बेसिस पर ट्रेनिंग शुरू कर दी। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2013 और 2015 में एशियाई चैंपियनशिप्स (पुणे) के लिए उन्हें सेलेक्ट कर लिया गया। 2013 में 7वां स्थान प्राप्त हुआ जबकि 2015 में चौथा स्थान मिला।

अब जिंदगी में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि अचानक जिंदगी ने रुख मोड़ लिया और स्थिति बिगड़ गई। उनके पिताजी का डेथ हो गया उसके बाद उन्हें ग्रोइन इंजुरी हो गई।

जिंदगी ने रास्ते में जितने कांटे बोए उन कांटों को उन्होंने धैर्यपूर्वक चुन लिया और मंजिल की तरफ़ बढ़ती चली गईं

The Indian Express को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ” पिताजी के देहांत के बाद माताजी डिप्रेशन में चली गईं। उनका कुछ भी कर पाना मुश्किल हो गया था। पूरा परिवार मुझपर आश्रित था।”

उसके कुछ दिन बाद एक और झटका लगा जब गोमती के कोच का भी डेथ हो गया। गोमती को ट्रेन करने के लिए कोई भी नहीं था। उन्हें घर को भी संभालना था। लेक़िन गोमती ने बहादुरी और संयम से काम लेते हुए इन मुश्किल हालातों को हरा दिया। जिंदगी ने रास्ते में जितने कांटे बोए उन कांटों को उन्होंने धैर्यपूर्वक चुन लिया और मंजिल की तरफ़ बढ़ती चली गईं।

30 साल की उम्र में जब ज्यादातर एथलीट रिटायरमेंट की सोचते हैं तब गोमती ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इस उपलब्धि के साथ ही गोमती ने इस बात को सिद्ध कर दिया कि नए सिरे से शुरू करने में कभी देर नहीं होती।

~Shravan Pandey

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