डार्विन थियरी पर मुहर लगाते विष्णु के दस अवतार

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कुछ समय पहले चार्ल्स डार्विन के एवोल्यूशन थियरी (विकासवादी सिद्धांत) को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि,’हमारे किसी भी पूर्वज ने लिखित या मौखिक रूप में बंदर के इंसान में बदलने का ज़िक्र नहीं किया था।’ समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने  कहा कि मनुष्यों के क्रमिक विकास का चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से ग़लत है। स्कूलों और कॉलेजों के सिलेबस में इसे बदलने की ज़रूरत है। इंसान जब से पृथ्वी पर देखा गया है, हमेशा इंसान ही रहा है।

भले ही चार्ल्स डार्विन के एवोल्यूशन थियरी पर अमेरिका जैसे देश के लगभग आधे नागरिक सहमत ना हों। इस्लाम और ईसाइयत को मानने वाले अरबों लोग विज्ञान की दुनिया में एक खास रुतबा रखने वाले डार्विन के ‘विकासवादी सिद्धांत’ को यह कहकर नकार देते हों कि मानव आज जैसा है, वह अपने शुरुआती दौर में भी वैसा ही था। लेकिन इन सबसे इतर हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यताओं में भगवान विष्णु के दस क्रमिक अवतारों के जरिए “विकासवादी सिद्धांत” का दर्शन देखने को मिलता है।

1) मत्स्य अवतार:-
मत्स्य अवतार
मत्स्य अवतार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिन्दुओं के आराध्य भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मछली के रूप में लिया था। आश्चर्य की बात है कि चार्ल्स डार्विन ने भी अपने विकासवादी सिद्धांत में यह बात कही थी कि धरती पर सर्वप्रथम जलचर यानी पानी में रहने वाले जीव अस्तित्व में आए।

2) कूर्म अवतार:-
कूर्म अवतार
कूर्म अवतार

पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु के दूसरे अवतार का नाम था कूर्म। कूर्म का मतलब होता है कछुआ। जैसा कि हम सब जानते हैं कि कछुआ एक उभयचर प्राणी है। पहले जलचर मछली और फिर उभयचर कछुआ, विष्णु के अवतार का यह क्रम चार्ल्स डार्विन के उस विकासवादी सिद्धांत को मजबूती देता है जिसके अनुसार जीवन जल से धरती पर आया।

3) वराह अवतार:-
वराह अवतार
वराह अवतार

चार्ल्स डार्विन का विकासवादी सिद्धांत कहता है कि जीवन के जल से धरती की ओर आने के बाद क्रमिक विकास में धरती पर तेज दौड़ने वाले जीवों का विकास हुआ। विष्णु का तीसरा अवतार भी जलचर मत्स्य, उभयचर कूर्म के बाद तेज दौड़ने वाले ‘वराह ‘ के रुप में हुआ।

4) नरसिंह अवतार:-
नरसिंह अवतार
नरसिंह अवतार
भगवान विष्णु का यह अवतार चार्ल्स डार्विन के विकासवादी सिद्धांत पर बहुत बड़ी मुहर लगाता है। जिसमें यह कहा गया है कि इंसानों की उत्पत्ति जानवरों से हुई। क्योंकि भगवान विष्णु का शरीर नरसिंह अवतार में आधा मनुष्य का और आधा सिंह का था । क्रमिक विकास का सिद्धांत भी यही बात कहता है कि पहले चरण में अर्धमानव पैदा हुए थे।
5) वामन अवतार:-
वामन अवतार
वामन अवतार

चार्ल्स डार्विन ने अपने विकासवादी सिद्धांत में यह दावा किया था कि मानव अपने प्रारम्भिक दौर में शारीरिक कद काठी में अविकसित थे। दूसरे शब्दों में कहें तो अपने शुरुआती दौर में मानव बौने हुआ करते थे। कमाल की बात यह है कि भगवान विष्णु के 5वें अवतार वामन के बारे में यह कहा जाता है कि यह विष्णु का बौना अवतार था।

6) परशुराम अवतार:-
परशुराम अवतार
परशुराम अवतार

जैसा कि मानव का क्रमिक विकास यह दावा करता है कि मानव धीरे-धीरे अपनी सूझबूझ का विकास करते हुए हथियारों को बनाने और उनका इस्तेमाल करने की कला में पारंगत हो गया। विष्णु के छठवें अवतार परशुराम भी अपने साथ हथियार के रूप में फरसा लिए रहते थे। जिसका इस्तेमाल उन्होंने एक जाति विशेष के संहार के लिए किया।

7) राम अवतार:-
राम अवतार
राम अवतार

वह दौर भी आया जब मानव एकांत की बजाय समूह बनाकर रहने लगा। वह गुफा से होते हुए कबीलों और फिर पक्के निर्माणों में एक साथ एक छत के नीचे रहने लगा। परशुराम के बाद राम का अवतार चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रतिपादित मानव के इस क्रमिक विकास पर साफ मुहर लगाता दिखता है।

8) कृष्ण अवतार:-
कृष्ण अवतार
कृष्ण अवतार

अब जब मानव समूह में रहने लगा तब वह समूह में रहने के लिए आवश्यक नीति-संबंध, सामाजिक-व्यवस्था, राजनीतिक प्रबंधन जैसे चीजों को भी सीखता चला गया। राम के बाद हुए कृष्ण अवतार के दौरान घटी घटनाएं भी इसी की तरफ इशारा करती हैं।

9) बुद्ध अवतार:-
बुद्ध अवतार
बुद्ध अवतार

चार्ल्स डार्विन के थियरी के अनुसार मानव समय के साथ मानसिक रूप से और ज्यादा समृद्ध होता गया। बुद्ध के रूप में विष्णु का यह अवतार भी इस बात को सही साबित करता हुआ दिखाई देता है। क्योंकि बुद्ध ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने अंतिम सत्य को जान लेने का दावा किया था।

10) कल्कि अवतार:-
कल्कि अवतार
कल्कि अवतार

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के दस अवतारों में से जो सबसे आखिरी अवतार होगा वह सबसे ज्यादा विकसित स्वरूप का होगा। अब तक कल्कि अवतार हुआ नहीं है यानि वह भविष्य में होगा। बात जब भविष्य की हो तो यह तय है कि तब आदमी अतिविकसित ही होगा। यानि यहां भी विष्णु का यह अवतार चार्ल्स डार्विन की थियरी ऑफ एवोल्यूशन पर अपनी मुहर लगाते दिख रहा है।

इन सब को देखकर कम से कम यह तो तय हो गया कि वह कौन-सा छुपा हुआ कारण था जिसके चलते डार्विन का जो विरोध स्वयं के विकसित होने का दंभ भरते पश्चिम समाज मेंहुआ। वैसा कोई बड़ा हो-हल्ला डार्विन की थियरी को लेकर भारत में नहीं काटा गया।

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