तुम आज खफ़ा मत हो जाना।

तुम आज खफ़ा मत हो जाना जो मैं दिल की बात कहूँ।
आंखों के आंसू रुकते नहीं, रो रो मैं दिल की बात कहूँ।

तू परी रही, सज़दा तेरा था, प्यार बहुत दोनों ने किया,
सपने मेरे जो रहे अधूरे उनमे खो मैं दिल की बात कहूँ।

तेरा अक्स मेरा साया सा रहा, कब दोनों जुदा हो पाए थे,
बहते अश्कों से अपनो आंखें धो मैं दिल की बात कहूँ।

कुछ ख़्वाब हमारे अपने थे, सपनो का महल बनाया था,
फिर आज उसी अम्बर के नीचे सो मैं दिल की बात कहूँ।

खुशनुमा रहा वो वक़्त बड़ा, माना वो बेहद छोटा था,
फिर से उन सब यादों के कांटे बो मैं दिल की बात कहूँ।

बुरा तुझे कब कह पाया, दिल चाहा भी पर शब्द नही,
फिर से पल भर को बस तेरा हो मैं दिल की बात कहूँ।

आज भी तेरी यादों में, कभी हंसता तो कभी रोता हूँ,
तेरा दिल भी क्या कहता है जो मैं दिल की बात कहूँ।

©रजनीश “स्वछंद”

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