तो क्या सेना के नाम पर चमकेंगे राहुल गांधी के सियासी सितारे

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लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई अभी थोड़ी दूर है। मगर राजनीतिक दलों ने हुंकार भरना शुरू कर दिया है। सत्तारूढ़ भाजपा अपने विपक्षियों से चौतरफा घिर रही है। भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे के चिर-प्रतिद्वंदी रहे हैं। जब कांग्रेस सत्ता में थी तब भाजपा उस पर हमले बोला करती थी और अब जब भाजपा सत्ता में है तो कांग्रेस भाजपा पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

राफेल का मुद्दा कांग्रेस के लिए कितना लाभकारी साबित होगा यह तो चुनाव के बाद ही तय हो पाएगा। लेकिन राफेल को लेकर राहुल गांधी कांग्रेस के सियासी सितारे को चमकाने की जुगत में लगे हुए हैं। राहुल गांधी किसी भी रैली में राफेल का मुद्दा उठाने से चुकते नहीं हैं। पहले तो राहुल गांधी केंद्र की सत्तासीन भाजपा सरकार पर किसानों के बहाने हमला बोला करते थे। लेकिन, अब राहुल गांधी को एक और हथियार मिल गया है। राहुल गांधी और उनका समर्थन करने वाले कुछ राजनीतिक दल राफेल मुद्दे को 2019 के चुनाव के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।

पहले जब राहुल गांधी कहीं रैली करते थे तब लोगों को संबोधित करते हुए वह नौजवानों, किसानों और गरीबों का मुद्दा उठाकर केंद्र सरकार पर हमला करते और राफेल का नाम लेना नहीं भूलते थे। लेकिन पुलवामा हमले के बाद राहुल गांधी ने अपना नया राग अख्तियार किया है। अब राहुल गांधी सेना के नाम पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हैं और फिर अगली लाइन में राफेल का मुद्दा जोड़ देते हैं।

इस समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रांची, झारखंड में रैली कर रहे हैं। इस रैली के दौरान राहुल गांधी ने सेना की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने सेना का आभार व्यक्त किया। केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इंडियन एयर फोर्स देश की सुरक्षा करती है। एयर फोर्स के पायलट अपना बलिदान कर देते हैं, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री एयर फोर्स से पैसा चुरा कर वह पैसा अनिल अंबानी की जेब में डालते हैं। यह शर्मनाक है।

अब यहां सवाल यह उठता है कि जो कांग्रेस अब तक भाजपा पर सेना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही थी, क्या वह सेना का राजनीतिकरण नहीं कर रही? क्या अब सेना के नाम पर ही राहुल गांधी के सियासी सितारे चमकेंगे?

~Shravan Pandey

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