तो क्या 46,000 करोड़ रुपये के कर्ज तले दबी अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया हो जाएगी!

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अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस ( Reliance Communications ) ने दिवालियेपन के लिए कार्यवाही का विकल्प चुनने का फैसला किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उधारदाताओं को वापस भुगतान करने में अपनी विफलता के बाद, यह दिवालिया कानून के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ( NCLT ) से संपर्क करेगा।

इसके तुरंत बाद, कंपनी के शेयर सोमवार को 6 रुपये के अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गए। कंपनी के शेयर में 48% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह मंगलवार को 27.95 प्रतिशत गिरकर 5.44 रुपये पर बंद हुआ। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी 46,000 करोड़ रुपये के वित्तीय कर्ज में है। समूह को बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में 6,300 करोड़ रुपये के सामूहिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।

दिवालियेपन के लिए कार्यवाही ( Insolvency proceedings )

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी द्वारा 1 फरवरी को जारी बयान में कहा गया है कि आरकॉम ( RCom ) अपनी मदद के लिए NCLT का रुख करेगी ताकि वह समयबद्ध मामले में संपत्ति बेच सके। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) भारत की अर्ध-न्यायिक संस्था है जो भारतीय कंपनियों से संबंधित मामलों को हल करती है।

इसके अलावा, मई 2018 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने एक निपटान के हिस्से के रूप में आरकॉम के खिलाफ दिवाला कार्यवाही पर रोक लगाई थी। हालांकि, 4 फरवरी को आरकॉम ( RCom ) ने अपील वापस लेने के लिए NCLAT से संपर्क किया। NCLAT ने फैसला सुनाया कि RCom ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना चल या अचल संपत्ति नहीं बेच सकता। इस पर अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

Ericsson बनाम RCom

समय सीमा के विस्तार के बाद भी स्वीडिश दूरसंचार उपकरण निर्माता Ericsson के लिए RCom द्वारा 550 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान करने में विफल रहने पर, एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में जनवरी 2019 में अपनी दूसरी अवमानना याचिका दायर की। अवमानना याचिका में एरिक्सन ने कहा है कि जब तक कि अंबानी भुगतान सुनिश्चित नहीं करते तब तक उन्हें हिरासत में लिया जाय और विदेश यात्रा पर रोक लगा दी जाय। 28 सितंबर, 2018 को अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी ने बकाया राशि का निपटान करने के लिए 30 सितंबर की पूर्व निर्धारित समय सीमा में 60 दिन का विस्तार करने के लिए कहा था।

इसलिए, RCom के पास 15 दिसंबर तक का समय था। हालांकि, कंपनी फिर से बकाया का भुगतान करने में विफल रही, जिसके बाद Ericsson ने दूसरी याचिका दायर की। Ericsson का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अनिल खेर ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “नया आवेदन इसलिए दायर किया गया था क्योंकि आरकॉम और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। हम लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनका डिफ़ॉल्ट अदालत की अवमानना है।

इससे पहले Ericsson ने पेमेंट में कथित चूक के बाद अनिल अंबानी और उनके समूह के दो वरिष्ठ अधिकारियों को देश छोड़ने की अनुमति नहीं देने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। बताया जा रहा है कि अदालत के आदेश की अवहेलना के लिए आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी की सभी संपत्तियों को जब्त करने के लिए Ericsson सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाने के लिए तैयार है।

~Shravan Pandey

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