नेताजी के जन्मोत्सव ”देश प्रेम दिवस” के मौक़े पर महान व्यक्तित्व को समर्पित मेरी शाब्दिक भावनाएँ – गाँधी सुभाष

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नेताजी ! तेरे देश में

मातृभूमि हम सबकी प्यारी,
फिर से आज बेहाल हुई है।
कोटि – कोटि संतति है इसकी,
फिर भी यह निहाल हुई है !!
कहां है अब झांसी सी रानी,
जिसने यह गुलशन महकाया।

रणक्षेत्र में कूद की जिसने,
औरत का जौहर दिखलाया..!
याद रखेंगे तुझको रानी,
यह कहकर उन्हें विदा किया !
पाकर हमने सुखों की छाया,
आज है उनको भुला दिया ..!!

मातृभूमि आक्रांत हुई फिर,
उठी आतंकवाद की ज्वाला है।
लाल दलाल बने माँ के …,
बस घूसखोरी से पाला है ….!!
भाषायी विवाद उठे हैं ..,
तो कहीं जातिवाद ने घेरा है ..!
बोलूं तो किस मुंह से बोलूं,
कि सभ्य भारत मेरा है …. !!

धरती तेरी सुखद सलोनी,
बंजर और वीरान हुई है .. !
नहीं पर वह किसी को तेरी,
लापरवाह संतान हुई है !!
अशफाक भगत बिस्मिल जो थे
फंदे पर फांसी के झूले ..!
वह कर नफरत के भावों में,
हम उनकी कुर्बानी भूले ..!!

नानक गौतम गांधी नहीं अब,
अहिंसा का जो पाठ पढ़ाए !
ऐसे लोग अब बने हैं नेता,
साम्प्रदायिकता की जो आग भड़काए।
क्षेत्रवाद की आग लगी है,
बना दुश्मन भाई – का – भाई …. !
नैतिकता के सूखेपन में,
कलियां यौवन की मुरझाई ….!!

नेताजी .. ! तेरे देश में,
क्या हो रहा यह आज … !
जय हिंद जैसे नारों पर अब,
मचने लगा मजहबी उत्पात !!
देखोगे जब ऐसा आलम,
क्या तुम दिल पर सह पाओगे ?
एक आजादी और दिलाने,
नेताजी फिर कब आओगे.. !!

कवि – गाँधी सुभाष

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