प्रियंका गांधी वाड्रा दूसरी ‘इंदिरा’ तो फिर कांग्रेस के राहुल गांधी का क्या होगा?

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भारत की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया। समय था राहुल की बहन और राबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा के सक्रिय राजनीति में एंट्री की। अब तक चुनावों में अमेठी और रायबरेली की सीटों के लिए प्रचार करने वाली प्रियंका सक्रिय राजनीति से दूर थीं मगर अब उन्होंने अपना डेब्यू कर ही लिया। भले ही प्रियंका सक्रिय राजनीति में नहीं थीं मगर परदे के पीछे से अपना रोल निभाती रही हैं। ऐसा उस वक़्त देखने को मिला था जब राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए खींचातानी चल रही थी, प्रियंका ने उस वक़्त बैठक में हिस्सा लेकर अपने ताकत का प्रदर्शन किया था।

कांग्रेस के समर्थकों को प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि दिखती है। वो अलग बात है कि प्रियंका ने अपनी पार्टी के लिए एक जमीनी स्तर के कार्यकर्त्ता से भी कम काम किया है। प्रियंका को जो पद इतनी आसानी से मिल गया वह पद तो पार्टी में कई वर्षों से कड़ी मेहनत करने वाले कई नेताओं को नहीं मिला। यह पद प्रियंका को विरासत में मिला है। आज प्रियंका गांधी वाड्रा अपने करियर की शुरुआत करने अपने भाई राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अमौसी एअरपोर्ट पर उतरीं। उसके बाद पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत वह एक बस के छत पर खड़ी थीं। और इसमें कोई दो राय नहीं कि वह अपनी दादी इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरासत पर खड़ी थीं। प्रियंका के एंट्री से कार्यकर्ताओं में जोश और जूनून सातवें आसमान पर पहुँच गया।

अब बात करते हैं उस खबर की जिसमें प्रियंका और इंदिरा में समानता देखी जा रही है। कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा का चेहरा उनकी दादी इंदिरा गांधी से मिलता है। प्रियंका की साड़ी, उनके शार्प नोज, उनकी हेयर स्टाइल लोगों को इंदिरा गांधी की याद ताजा करा रही है। प्रियंका के लुक्स के अलावा उनके तौर-तरीके भी इंदिरा गांधी से काफी मिलते जुलते हैं। लेकिन, प्रियंका और इंदिरा के बीच तुलना करने से प्रियंका का कद भले ही ऊँचा हो जायेगा मगर इंदिरा का कद जरुर छोटा होगा। एक तरफ अनुभवी इंदिरा और उनका संघर्ष तो दूसरी तरफ नई नवेली प्रियंका गांधी वाड्रा। कांग्रेस जनता के इसी सोच का भरपूर इस्तेमाल करना चाहती है। अब इंदिरा के नाम पर प्रियंका की एंट्री से पार्टी की तक़दीर बदलने की कोशिश की जा रही है।

एक खास बात यह भी है कि प्रियंका की पृष्ठभूमि में इंदिरा गांधी की भी तस्वीर थी। अब कांग्रेस इंदिरा की खासियत से प्रियंका के कमियों को छिपाने में लगी हुई है। प्रियंका गांधी ने एक बार कहा था, “जितना कठिन हम गिरते हैं, हम उतने ही मजबूत होते हैं, यही मैंने इंदिरा गांधी से सीखा है।” मतलब प्रियंका भी खुद को इंदिरा से जोड़ने में लगी हुई हैं। इंदिरा गांधी स्वतंत्र भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं थीं। प्रियंका गांधी वाड्रा भी महिला सशक्तिकरण को लेकर काफी मुखर रही हैं। प्रियंका ने कहा था, ” मैं एक बहन हूँ, एक माँ हूँ, एक बेटी हूँ, और एक पत्नी हूँ। लेकिन यह हमारी पहचान नहीं है। हम महिला हैं, यही हमारी पहचान है।

हाँ, एक समानता जरुर है कि इंदिरा को भी राजनीति में शोहरत विरासत में मिली थी। उनके पिता जवाहरलाल नेहरू से उन्हें यह पद मिला। ठीक उसी तरह आज प्रियंका को भी विरासत में मिला है। न चाहते हुए भी आज प्रियंका को देश की सबसे पुरानी पार्टी में एक अहम पद मिल गया है। प्रियंका ने कहा, “मेरे परिवार ने मुझे एक चीज सिखाया है कि इस देश की जनता से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। जहाँ एक तरह पॉलिटिकल पंडित प्रियंका की एंट्री को कांग्रेस के लिए ब्रह्मास्त्र के तौर पर देख रहे हैं तो वहीं कांग्रेस के राजनीतिक विरोधियों ने इसे राहुल गांधी की असफलता करार दी है।

लेकिन यहां तक कि बीजेपी भी इंदिरा गांधी के साथ प्रियंका गांधी की समानता से इनकार नहीं कर सकती। बीजेपी के लोकसभा सांसद अश्विनी कुमार ने कहा कि प्रियंका गांधी भारत की नई इंदिरा गांधी हैं, जिनका यूपी को इंतजार था। लेकिन प्रियंका गांधी आगामी आम चुनावों में कांग्रेस के लिए वरदान साबित होंगी या नहीं, परिणाम घोषित होने के बाद ही पता चलेगा। अगर प्रियंका अपने मंसूबों में सफल भी हो जाती हैं तो राहुल गाँधी के कद का क्या होगा? प्रियंका का प्रदर्शन अगर राहुल से बेहतर होता है तो फिर पार्टी में गुटों का निर्माण होना तय है। ऐसे में एकछत्र राज करने वाले राहुल की बहन खुद उनके लिए सिरदर्द साबित हो सकती हैं।

~Shravan Pandey

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