मंदिर-मस्ज़िद मामला: बाबरी ढ़हने के बाद दंगो की आग और लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट की कहानी

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अब जैसा कि राम जन्मभूमि- बाबरी मस्ज़िद विवाद से जुड़े छोटी-छोटी बातों को लेकर भारत भर में पिछ्ले दशक भर से दंगे भड़क रहे थे। तो लाज़मी था कि इतनी बड़ी घटना के बाद सामाजिक सौहार्द को स्वाहा तो होना ही था। हुआ भी। बाबरी मस्ज़िद गिराए जाने के बाद इसकी प्रतिक्रिया में सिर्फ भारत ही नही तो समस्त भारतीय उपमहाद्वीप दंगो की आग से झुलस उठा।
मुंबई जैसे महानगरीय इलाके तक मे लगभग 800 से 900 लोग हिंदू-मुस्लिम दंगो की भेंट चढ़ गए। आज हम मुंबई में मुंब्रा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके देखते है वह इन दंगों के दौरान हुए पलायन का ही नतीजा है। अलग-अलग आंकड़ो का औसत निकाले तो भारत भर में लगभग 2000 लोग इन दंगों की बलि चढ़ गए थे। इस दौरान घायलों और आर्थिक नुकसान का तो कोई सटीक हिसाब ही नही।
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लेकिन इन दंगों के कारण लगी आग की लपटों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश तक को लपेट लिया। इन मुस्लिम बहुल देशों में एंटी-हिंदू दंगे शुरू हो गए। हिंदुओ और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों का एल दौर से शुरू हो गया। इस दौरान कई हिंदू मारे गए और कई मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। जब लगा कि मामला धीरे धीरे शांत हो रहा है तभी देश को सन्न कर देने वाली एक घटना मुंबई में घटती है। 1993 को यहां एक के बाद एक हिंदू बहुल इलाकों में सीरियल बम ब्लास्ट होते है। जिसमे एक ही दिन में एक साथ 200 मासूम जिंदगियां मौत के मुंह मे समा जाती हैं। इसके बाद फिर वही क्रिया-प्रतिक्रिया वाला खूनी खेल शुरू हो जाता है।
बाबरी मस्ज़िद ढहाए जाने के कारण, घटनाक्रम और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जांच के लिए जस्टिस लिब्राहन की अध्यक्षता में लिब्राहन आयोग का गठन किया गया। लिब्राहन आयोग आजाद भारत मे सबसे लंबा चलने वाला जांच आयोग था। 48 बार इसने अपना निर्धारित समयकाल आगे बढ़ाया। जिसके चलते इसे अपमी रिपोर्ट पेश करने में करीब 17 साल जितना लंबा समय लग गया। यानी जिस आयोग का गठन 1992-93 में किया गया उसने अपनी रिपोर्ट 2009 में पेश की। वो भी तब जब यह रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई। वरना ना जाने और कितना इंतजार करना पड़ता।
Related imageजब यह रिपोर्ट संसद की पटल पर रखी गई। तब रिपोर्ट के अनुसार बाबरी मस्ज़िद ढहाए जाने के लिए मुख्यरूप से 68 नामज़द लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया। इनमे लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, अटल बिहारी वाजपेयी, अशोल सिंघल जैसों का नाम शामिल था। इतना ही नहीं तो इस रिपोर्ट में इस घटनाक्रम के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार या कहे प्रमुख गुन्हेगार तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को ठहराया गया।
इसके साथ ही लिब्राहन आयोग द्वारा बाबरी मस्ज़िद ढहाए जाने को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों की सोची समझी साज़िश करार दिया गया। इस गुनाह में आयोग द्वारा भारतीय जनता पार्टी को भी बराबर का भागीदार बताया गया। लेकिन वीएचपी, आरएसएस और बीजेपी में लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट को यह कहकर सिरे से ख़ारिज कर दिया कि यह राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है। इसमे कहीं भी केंद्र सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरसिम्हा राव ओर सवाल नही खड़े किये गए है। जबकि सारे घटनाक्रम में उनके द्वारा भी ढेर सारी गलतियां की गई थी। …… क्रमशः
रोशन ‘सास्तिक’

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