मंदिर-मस्ज़िद मामला: राम मंदिर होने के पीछे का तर्क और इस तर्क को ठुकराने वाले पॉइंटर्स

चलिए आज हम मंदिर-मस्ज़िद मामले में मंदिर समर्थकों के अपने सही होने के प्रमुख तर्क और मस्ज़िद समर्थकों द्वारा अपनी बात पर अड़े रहने के प्रमुख कारण जानते है।

मंदिर के पक्ष में दी गईं दलीलें 

१) पहला आधार लिया गया एएसआई द्वारा कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट का। मंदिर समर्थकों के अनुसार जब पुरातत्व विभाग ने यह कह दिया कि मस्ज़िद से पहले वहां एक मध्यकालीन मंदिर मौजूद था। तो फिर यह बात साफ हो जाती है कि वहां मस्ज़िद से पहले मंदिर मौजूद थी।
२) मुगलकाल के दौरान जो यूरोपीय यात्री भारत आए थे, उन्होंने भी अपने यात्रा संस्मरण में इस बात का जिक्र किया हुआ है कि बाबर के शासनकाल के दौरान अयोध्या में एक मंदिर को तोड़कर मस्ज़िद बनवाई गई थी। जिसका नाम उन लोगों ने मस्ज़िद-ए-जन्मस्थान बताया। और जाहिर-सी बात है कि यह नाम उनके जानकारी में स्थानीय लोगों द्वारा ही आया होगा। तो इससे यह बात साफ हो जाती है कि वहां पहले राम मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्ज़िद बनाई गई। तो अब उस स्थान पर दोबारा मंदिर बनाना जरूरी है।
Image result for अयोध्या राम मंदिर३) इसके अलावा मंदिर के पक्षधरों ने यह भी कहा कि मस्ज़िद बन जाने के बावजूद वहां लोग सैकडों सालों पूजा करते आ रहे थे। मस्ज़िद होने के बावजूद अगर लोग पूजा-अर्चना कर रहे है, तो यह साफ है कि वहां पहले कोई ना कोई मंदिर रहा होगा।
४) चौथा आधार जनभावना को बताया गया। उनके अनुसार जब किसी चीज के निर्माण को लेकर करोड़ो लोगों की आस्था जुड़ी हो। फिर उस चीज को लेकर किसी तरह के वाद-विवाद या फिर बहस का क्या औचित्य।
मस्ज़िद के पक्षधरों का मत
१) सबसे पहले तो मस्ज़िद के पक्षधरों ने मंदिर के समर्थकों के पहले आधार को यह कहकर ख़ारिज बकर दिया कि एएसआई की रिपोर्ट आधी-अधूरी और बेनतीजा थी।
२) मस्ज़िद पक्षधरों द्वारा सबसे बड़ा मुद्दा बनाया गया 1576 में तुलसीदास द्वारा लिखे गए रामचरित्रमानस को। तुलसीदास के अनुसार उन्होंने अयोध्या में रहकर रामचरितमानस लिखी थी। सवाल यहीं से उठता है कि अगर 50साल पहले मंदिर को ढहाकर मस्ज़िद बनाई गई थी। तो फिर तुलसीदास ने इतनी बड़ी घटना का रामचरित्रमानस में कहीं कोई जिक्र क्यों नही किया।
Image result for अयोध्या राम मंदिर३) आगे उनका यह तर्क था कि गिराई गई मस्ज़िद अपने स्थान पर करीब 460 सालों से खड़े थे। यानी वह मस्ज़िद अपने आप मे लगभग आधी सदी पुरानी ऐतिहासिक इमारत थी। इस हिसाब से आप भारत के और कितने मंदिर और मस्ज़िद की ऐतिहासिकता की जांच करेंगे। और क्या आप करेंगे?
४) मस्ज़िद के पक्षधरों ने भी जनभावना को अपना एक आधार बनाया। उनका कहना था कि बाबरी मस्ज़िद से करोड़ों मुस्लिमों की भावनाएं जुड़ी हुई है। उसे तोड़े जाने के चलते उनकी भावनाएं आहत हुई है। इसलिए यह जरूरी है कि वहां दोबारा मस्ज़िद का निर्माण कराया जाए। ……. क्रमशः
रोशन ‘सास्तिक’
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