भारत का वह इकलौता Ambidextrous स्कूल, जहां दोनों हाथों से लिखते हैं बच्चे

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में भारत का एकमात्र Ambidextrous स्कूल है। Ambidextrous का आशय ऐसी क्षमता से होता है जिसमें व्यक्ति अपने दोनों हाथों से समान रूप से काम कर सकता है। भारत के पहले राष्ट्रपति में भी यह अद्भुत कला थी कि वह अपने दोनों हाथों से लिखने में माहिर थे। वर्तमान समय में दुनिया में सिर्फ 1% लोग ही ऐसी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। हमारे लिए गर्व की बात यह है कि भारत के मध्यप्रदेश में स्थित सिंगरौली इलाके में एक ऐसा स्कूल है जहां के 170 बच्चे दोनों हाथों से लेखन कला में निपुण हैं। दुनिया में अधिकतर लोग दाएं हाथ से लिखते हैं और बाएं हाथ से लिखने वालों की संख्या लगभग 10 फीसदी है. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे अजूबे भी हैं जो दाएं और बाएं दोनों ही हाथों से समान रूप से लिखने में सक्षम हैं। इतना ही नहीं दाएं और बाएं हाथ से लिखने का कमाल एक ही समय पर एक साथ करते हैं। यह सुनकर आपको बहुत आश्चर्य हो रहा होगा। लेकिन आगे की जानकारी आपको आश्चर्य के साथ-साथ गर्व से भी भर देगी।


दरअसलदुनिया में बेहद कम लोग ही दोनों हाथों से लिखने में सक्षम होते हैं। परंतुहमारे देश के बीचोबीच स्थित मध्यप्रदेश के सिंगरौली में एक ऐसा अनोखा स्कूल है जहां का बच्चा-बच्चा दोनों हाथों से लिखने का अजूबा करता है

सिंगरौली, मध्यप्रदेश के वीणा वादिनी स्कूल में 170 ऐसे बच्चे हैं जो अपने दोनों हाथों से लिखने में सक्षम हैं और वो भी एक साथ। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह भारत का पहला ही नहीं बल्कि इकलौता Ambidextrous(उभयहस्त, दोनों हाथों से सहज और समान रूप से काम करने वाला) स्कूल है। यह बेहद खास इसलिए है क्योंकि दुनिया में मुश्किल से सिर्फ 1% लोग ही ऐसे हैं जिनमें दोनों हाथों से एक बराबर काम लेने की क्षमता होती है।

बच्चे यह काम हिंदीइंग्लिशउर्दूसंस्कृतअरेबिक और रोमन जैसी 6-6 भाषाओं में कर सकते हैं

वीणा वादिनी स्कूल के बच्चों का अनोखापन सिर्फ उनका दोनों हाथों से लिखना ही नहीं है। जी हाँ, इसके अलावा और भी ऐसे कई अजूबे हैं जो इस स्कूल के बच्चों के लिए बेहद आसन हैं।एक ही समय पर एक साथ दोनों हाथों से लिखने वाले बच्चे यह काम हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, संस्कृत, अरेबिक और रोमन जैसी 6-6 भाषाओं में कर सकते हैं। सोचिए, जितनी भाषाएं हम जानते तकनहीं उससे ज्यादा भाषाओं में भारत के एक छोटे से गांव के बच्चे दोनों हाथों से लिख रहे हैं।

जैसा कि कबीर जी कह गए हैं कि गुरु बिना ज्ञान नहीं मिल सकता। यानि शिष्य के पास जो है वो सब गुरु का ही दिया हुआ है। तो सवाल यह उठता है कि वीणा वादिनी स्कूल के इनअद्भुत बच्चों का गुरु कौन है, जिसने इनके अंदर ऐसी विलक्षण प्रतिभा फूंक दी है। तो इन बच्चों को Ambidextrous बनाने वाले गुरु का नाम है बी.पी. शर्मा। पूर्व सेनाकर्मी बी.पी. शर्मा जी वीणा वादिनी स्कूल के प्रिंसिपल और संस्थापक हैं। बी.पी. शर्मा जी भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी के Ambidextrous (दोनों हाथ से लिखने की क्षमता) वाले गुण से बेहद प्रभावित रहे।

45 मिनट की क्लास में बी.पी. शर्मा 15 मिनट तक बच्चों को दोनों हाथों से लिखने का कराते हैं अभ्यास

अपने स्कूल के बच्चों में भी दुनिया मे दुर्लभ Ambidextrous गुण को विकसित करने के लिए बी. पी. शर्मा ने शुरू से ही उनपर मेहनत करना शुरू कर दिया था। वह बच्चों को पहले एक महीने दाएं हाथ से लिखवाने का प्रयास करते और उसके बाद दूसरे महीने उन्हें बाएं हाथ लिखने के लिए कहते। इसी तरह के लगातार प्रयास के बाद जब बच्चे दोनों हाथों से लिखने में अभ्यस्त हो जाते हैं तब बी.पी. शर्मा उन्हें एक साथ दोनों हाथों से लिखवाने लगते हैं। 45 मिनट की क्लास में बी.पी. शर्मा 15 मिनट तक बच्चों को दोनों हाथों से लिखने का अभ्यास कराते हैं।

बात करें विज्ञान की तो वह भी दो हाथों से लिखने वाले बच्चों को एक हाथ से लिखने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा अक्लमंद मानता है। दरअसल, हमारा दिमाग दो हिस्सों में बंटा होता है। अपने ज्यादातर कामों के लिए दाएं हाथ से काम लेने वाले लोगों के दिमाग का बायां हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है और वही बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों के दिमाग का दायां हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है। वहीं दोनों हाथों से लिखने वाले बच्चों में दिमाग के दोनों भाग ज्यादा सक्रिय होते हैं। यही वजह है कि एक साथ दोनों हाथों से लिखने वाले बच्चों का सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक बुद्धिमान होने की संभावना अधिक होती है।

वीणा वादिनी स्कूल के बच्चे फर्राटेदार तरीके से बोल लेते हैं ’80’ तक का पहाड़ा

शायद यही कारण है कि मध्यप्रदेश के सिंगरौली के वीणा वादिनी स्कूल के सभी बच्चे न सिर्फ दुनिया की 6 भाषाओं में एक साथ दोनों हाथों से लिखना जानते हैं बल्कि वह ऐसा करते हुए 9घंटों में 35,000 शब्द भी लिख सकते हैं। इतना ही नहीं जहां सामान्य बच्चे 17,18,19 के पहाड़े में लड़खड़ाने लग जाते हैं वहीं वीणा वादिनी स्कूल के बच्चे ’80’ तक का पहाड़ा फर्राटेदार तरीके से बोल लेते हैं। ऐसे अद्भुत, अविश्वसनीय और अजूबे बच्चों का भविष्य तो उज्ज्वल है ही। अगर इन्हीं के तरह भारत के बाकी बच्चों को भी बनाया जाए तो भारत का भविष्य भी उज्ज्वल हो जाएगा।

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