मलेरिया के मामले में अफ्रीकी देशों जितनी बुरी है भारत की हालत – WHO

अगर ओलंपिक में ‘ढोंग करने’ का कोई खेल होता, तो यकीनन हम हर साल उसमे गोल्ड-सिल्वर- ब्रॉन्ज़ तीनों मेडल जीतते। क्योंकि इस दुनिया में ढोंग करने के मामले में हमसे बेहतर शायद ही कोई हो। क्योंकि जिस देश में आज भी हर दिन 20 करोड़ से अधिक लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हो, वो देश विश्वगुरु बनने का दावा कैसे ठोक सकता है। जो देश अभी तक भुखमरी और बहुत सामान्य, पर उचित इलाज के अभाव में बेहद जानलेवा बीमारियों को मात नहीं दे पा रहा है, वो दुनिया को कैसे पछाड़ पाएगा।

अभी हाल ही में रिपोर्ट आई थी कि उचित इलाज के अभाव में निमोनिया जैसी मामूली से दुनिया भर में मरने वाले बच्चों में एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले भारत के बच्चों का होगा। हमें शर्मसार या कहें आईना दिखाने वाली इसी तरह की एक और रिपोर्ट सामने आई है।WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017में पूरी दुनिया में सामने आए मलेरिया के कुल मामलों में से 80 प्रतिशत मामले अकेले भारत और 15 उप-सहारा अफ्रीकी देशों से थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में भारत के दृष्टिकोण से कहीं कुछ अच्छी बातें हैं तो कहीं कड़वी हकीकत। इस रिपोर्ट में यह तो बताया गया है कि 2016 की तुलना में 2017 में मलेरिया के मामलों में कमी लाने वाला भारत एकलौता देश है। लेकिन, इसी रिपोर्ट के दूसरे पन्नों पर यह भी लिखा गया है कि साल 2017 के दौरान भारत में करोड़ों लोग इस मच्छर जनित बीमारी की चपेट में आने की कगार पर थे। यानी हमनें मलेरिया से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या में जरूर कमी ला दी, लेकिन मलेरिया के कारकों का कोई खास इलाज नहीं कर पाए।

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