महाराष्ट्र के इस गांव में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को गुरुदक्षिणा में हर साल दी जाती है कार

हमें बचपन से सिखाया जाता है कि सर्वांगीण विकास के लिए आदमी का आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है। लेकिन आज अगर हम अपने आसपास नजर उठाकर देखे तो पाएंगे कि यहां ज्यादातर लोग और संस्था अपनी नाकामयाबी के लिए सरकार को कोसने में लगे रहते है। किंतु, इस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी है जो अपने विकास के लिए सरकार पर नही बल्कि अपने आप पर निर्भर रहने की सकारात्मक सोच रखते है।

आज जब देश के ज्यादातर सरकारी स्कूल अपनी दयनीय स्थिति को लेकर सरकारी अनदेखी का रोना रो रहे है। तब आपकों यह जानकर आश्चर्य होगा कि महाराष्ट्र के शिरूर तालुका के पिम्पले खालसा गांव में एक ऐसा जिला परिषद स्कूल भी है जिसके देखभाल और रखरखाव के लिए गांव वालों ने सरकार पर निर्भर होने की बजाय कुछ सालों में अपने तरफ से ही लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए है।
सिर्फ स्कूल ही नही तो स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर को भी प्रोत्साहित करने के लिए गांववालें हर साल कुछ न कुछ उपहार देते रहते है। गांववालें पहले हर साल अपने बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक को टीवी और फ्रिज जैसे सामान गुरुदक्षिणा में दिया करते थे। लेकिन पिछले चार सालों में अपने दिल को और बड़ा करते हुए गांववालों ने अपने बच्चों का भविष्य सँवारने वाले शिक्षक को गुरुदक्षिणा में कार देना शुरू किया है।

इस साल गांव वालों ने जिला परिषद स्कूल की टीचर ललिता धूमल को गांव के लोगों ने एक कार उपहार-स्वरूप भेंट की है। दरअसल, ललिता के प्रयासों और शिक्षा के चलते गाँव के 19 बच्चों ने वार्षिक सरकारी छात्रवृत्ति की परीक्षा पास की है, जिसका परिणाम 10 अगस्त को जारी किया गया था। ललिता ने बताया,”मैं कई सालों से इस स्कूल में काम कर रही हूँ। यहां के लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति काफी जागरूक हैं। और साथ ही वे शिक्षकों की मेहनत की भी सराहना करते हैं। इसलिए वे हर साल किसी न किसी शिक्षक को भेंट देते हैं।”

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