महिलाओं की सुरक्षा में भारत की शर्मनाक स्थिति, हर 30 मिनट पर एक रेप

साल 2012 में हुए निर्भया रेप केस के जख्म सूख भी नहीं पाए थे कि तब तक हवस के भेड़ियों ने और नए जख्म दे दिए। उन्नाव रेप और कठुआ में एक आठ साल की बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध ने देश की चेतना पर गहरा आघात किया है। अब हर महिला अपने आपको डर के साये में पा रही है। चलती राह उसके मन में एक डर सा लगा रहता है कि न जाने किस बुरी नीयत वाले हवसी भेड़िये की नजर उसके ऊपर हो। देश में हुए बलात्कार और उसके बाद हत्या के मामलों में कई बार कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन हुए, कई कड़े कानून बनाये गए मगर आज भी यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। इतना सब कुछ होने के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है। आइये एक नजर डालते हैं उस रिपोर्ट पर जो देश की इस भयावह तस्वीर की सच्चाई पेश करती है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 की तुलना में भारत में बलात्कार के मामले में 12.4% की बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2016 में बलात्कार के कुल 38,947 मामले दर्ज हुए। बलात्कार के मामले में 4,882 केस के साथ मध्य प्रदेश शीर्ष पर रहा। वहीं 4,816 बलात्कार के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा। तीसरे स्थान पर काबिज महाराष्ट्र में 4,189 मामले दर्ज हुए। जब बात आती है महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर की तब यह अवार्ड देश की राजधानी दिल्ली के नाम जाता है। NCRB के सालाना सर्वेक्षण के बाद महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली सबसे असुरक्षित शहर माना गया है।
आंकड़ों के आईने में

2001 से लेकर 2013 तक लगभग 57 रेप के मामले प्रतिदिन दर्ज किये गए। इस हिसाब से 13 साल के आँकड़े में हर घंटे में 2 रेप का मामला सामने आता है। 2001 से लेकर 2013 की अवधि के दौरान कुल 28 राज्यों और 7 केन्द्रशासित राज्यों से 2,72,844 मामले दर्ज हुए। साल 2016 में जारी NCRB की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2014 में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाये जाने के बावजूद भी प्रतिदिन 100 महिलाओं का बलात्कार हुआ और 364 महिलाएं यौन शोषण का शिकार हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में केंद्रशासित राज्यों और प्रदेशों में कुल मिलाकर 36,735 मामले दर्ज हुए थे।

बता दें, साल 2011 से 2016 के बीच राजधानी दिल्ली में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में 277% इजाफा हुआ है। साल 2011 में जहां दुष्कर्म के कुल 572 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2016 में यह आंकड़ा 2,155 रहा। अप्रैल 2017 तक इनमें से 291 केसों का नतीजा नहीं निकला था। निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म के दर्ज मामलों में 132% का इजाफा हुआ है। साल 2017 में अकेले जनवरी में दुष्कर्म के 140 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा मई 2017 तक दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 836 मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में से एक भारत 

एक रिपोर्ट के मुताबिक़, महिलाओं के लिए सबसे असुरिक्षत देशों में भारत भी शामिल है। इस मामले में भारत को विश्व में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। यूनिसेफ की रिपोर्ट ‘Hidden in Plain Sight’ के मुताबिक़, भारत में 15 साल से 19 साल की उम्र वाली 34% विवाहित महिलाएं अपने पति या साथी के बदनीयती का शिकार हुईं।15 साल से 19 साल तक की उम्र वाली 77% महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें अपने पति या साथी के द्वारा कम से कम एक बार यौन संबंध बनाने या अन्य किसी यौन क्रिया में जबरदस्ती का शिकार होना पड़ा। एक अन्य रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में 10 में से 6 पुरुष ऐसे हैं जिन्होंने कभी न कभी अपनी पत्नी अथवा प्रेमिका के साथ हिंसक व्यवहार किया है। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि यह प्रवृत्ति उन लोगों में ज्यादा है जो आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।


ये आंकड़े इस बात कि गवाही दे रहे हैं कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। सत्ता में कोई भी सरकार रही हो उसने इस दिशा में कुछ ख़ास नहीं किया है। सुरक्षा के लिहाज से महिलाओं के लिए देश कल भी असुरक्षित था और आज भी असुरक्षित है। आज के हालात को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि आने वाला कल भी कुछ खास नहीं होगा। लेकिन अब वक्त आ चुका है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए मिलकर एक साथ एक पहल करें। बहू-बेटी को घर की इज्जत कहने वालों जरा सोचिये कि इस तरह से अगर इनकी आबरू लुटती रही तो मर्द कहलाने लायक नहीं रह जाओगे।

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