मुखबिरों ने ‘अरुणाचल अनाथालय’ में भयानक स्थितियों का किया खुलासा, कल्याण के नाम पर अत्याचार

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अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट इलाके में एक अवैध अनाथालय-सह-स्कूल से 50 बच्चों को छुड़ाया गया है। ये बच्चे 6 साल या उससे कम उम्र के थे। यहाँ इसी साल फरवरी महीने से बांस और फूस के जर्जर बनावट में अवैध गृह(Illegal home) संचालित किया जा रहा था। अधिकारियों को इस बात की ख़बर तब पड़ी जब पूर्व कर्मचारियों ने पूर्वी सियांग जिले के बाल कल्याण समिति(CWC) से इस मामले में पिछले महीने शिकायत की।
5 कमरे में ठूंसे गए 50 बच्चे, खाने-पीने की नहीं थी उचित व्यवस्था
इस बात की ख़बर मिलने के बाद जब अधिकारी उस अवैध गृह को ताला लगाने गए तब उन्हें पता चला कि 5 कमरे में 50 बच्चों को ठूंसकर भरा गया था। इन कमरों में वायुसंचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। एक ही बेड पर 10 बच्चों को सोना पड़ता था। पीने के लिए नल का पानी दिया जाता था। इतना ही नहीं एक दिन में उन्हें दो वक़्त के खाने के तौर पर चावल और पानी के समान दाल परोसा जाता था। इस तरह के खान पान से वे कुपोषण का शिकार हो गए थे।
ग़रीब बच्चों के लिए फरवरी में हुई थी फ़्रेंडशिप फाउंडेशन एकेडमी की शुरूआत
मिली जानकारी के मुताबिक़, कर्मा भूटिया नामक एक शख्स ने अनाथ, एकल माता-पिता और गरीब परिवार के बच्चों के लिए फरवरी महीने में फ़्रेंडशिप फाउंडेशन एकेडमी(Friendship Foundation Academy) की शुरूआत की थी। जग़ह कैसा भी हो सकता था मग़र उसे फ्रेंडली होना जरुरी था। बदहाली झेल रहे बच्चों की शिक्षा के लिए जिम्मेदार शिक्षकों ने वेतन न मिलने की स्थिति में उन्हें पढ़ाना छोड़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं खाना पकाने वाले रसोइए भी ऐसा ही करने लगे।
बिना रजिस्ट्रेशन के ही स्कूल और अनाथालय में लिख लिया गया था 50 बच्चों का नाम
पूर्वी सियांग जिले के बाल कल्याण समिति(CWC) को एक महीने पहले ही पूर्व में स्कूल से जुड़े कुछ लोगों के माध्यम से बच्चों की दुर्दशा के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। बाल कल्याण समिति(CWC) के अध्यक्ष ओबंग दाई ने उपायुक्त को एक रिपोर्ट में कहा है कि स्कूल और अनाथालय का कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं था। बावजूद इसके इसमें 50 बच्चों का नाम लिख लिया गया था। इस रिपोर्ट में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के उल्लंघन का हवाला देते हुए उस गृह को बंद करने की सिफारिश की गई थी।
माता-पिता को सौंपे गए ‘पीड़ित बच्चे’, ग़रीब परिवारों से है इनका ताल्लुकात
बाल अधिकार संरक्षण के लिए अरुणाचल प्रदेश राज्य आयोग के सदस्य(APSCPCR) और पूर्वी सियांग बाल कल्याण समिति(CWC) ने पासीघाट के आसपास के करीब 38 बच्चों को उनके मां-बाप को सौंप दिया। जबकि अन्य 22 को गुरुवार को नाहरलगुन के एक रजिस्टर्ड धर्मार्थ बच्चों के घर में ले जाया गया। यह रजिस्टर्ड धर्मार्थ बच्चों का घर पासीघाट के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 255 किलोमीटर दूर है। इन 22 बच्चों में से केवल 5 अनाथ हैं। ज्यादातर बच्चे गरीब परिवार से हैं। ये बच्चे पापुम पारे, क्रा-डाडी और कुरुंग कुमेय जिले से हैं। कर्मा भूटिया का कुछ अता-पता नहीं है। वह फरार चल रहा है। हो सकता है कि वह राज्य छोड़कर भाग गया हो। पुलिस भी उसके बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

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