मुझे एक प्यारी सी पहचान चाहिए

पहली दफा तुम्हें देखा तो ऐसा लगा मानो,
ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है,
पहली बार दिल ने तुम्हें अपना कहना चाहा,
पर हाल-ए-दिल- कह न पाए,
शायद ये मेरा अंदाज था तुम्हें बताने का कि,
बस तुम्हारे लिए ही इन आँखों में नमीं सी है,
ये समां भी कितनी अजीब है,
खुले आसमां तले,
हर तरफ बर्फ मानों ज़मीं सी है,
पूरी निशा गुजारी उसके संग,
रात भी मानों उस पल में थमी सी है,
रात भर बातें प्यार से हुईं,
लेकिन,

प्यार का कहीं जिक्र भी न हुआ,
कितनी उमंगें हैं इस यौवन भरे पल में,
खुद को भूलकर तुझमें,
मैं रमी सी हूँ,
मैं एक टक उसको निहारती रही,
वो मुझे देखता रहा अपलक,
मैं सहम सी गयी,
वो मुस्कुराता रहा,
मुस्कुराते हुए कहता रहा,
तुम पागल हो,
तुम बिन मेरी भी आँखें गमीं सी हैं,

फिर उठकर उसने मुझे प्यार से,
बाहों में भरा,
एक पल के लिए रुका,
मानो वो भी सदियों से कोई राज छुपाये बैठा हो,
फिर हौले से उसने मुझे बाहों में कसा,
मस्तक को चुमते हुए बोला,
तुम बिन मेरी दुनिया रुकी सी है,
मैं वर्षों पुरानीं यादोँ के,
संदूकें खोलना चाहती थी,
उसके सामने,

लेकिन वो बिन कहे ही मेरी जु़बां को समझता था,
उसको लेकर उड़ जाना चाहती हूँ
मैं नील गगन में,
इन्द्रधनुष को सेज बनाकर,
उसके साथ दूसरी दुनिया में खो जाना चाहती हूँ….
मेरे इस रिश्ते को एक नाम चाहिए…..
मुझे एक प्यारी सी पहचान चाहिए ………क्या आप दोगे?

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