मैग्ना कार्टा: जब दुनिया में पहली बार कानून सबसे ऊपर उठ गया

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समाज में स्वस्थ जीवन जिनके लिए कुछ बंधन नितांत आवश्यक होते है और ये बंधन समाज अपनी स्वेच्छा से स्वयं पर लागू करता है। नदी भी तब तक ही मनभावन और मनमोहन प्रतीत होती है जब तक वह अपने मर्यादा या फिर कहे दायरे रूपी दो किनारों के बीच रहकर बहती है। किनारे तोड़ते ही वह नदी से बाढ़ में तब्दील हो जाती है और तब वह रौद्र और भयानक लगने लगती है।
आदमी की आजादी को लेकर भी यही समीकरण काम करता है। हर किसी की व्यक्तिगत और सामाजिक गतिविधि पर कानून की नकेल आवश्यक होती है। तेरहवीं सदी के आरंभ में थेम्स नदी के किनारे बसे शहर के राजा किंग जॉन को लेकर ऐतिहासिक कानूनी दस्तावेज ‘मैग्ना कार्टा’ ने भी ऐसा ही कुछ काम किया था। जिसका उदाहरण आज भी हर उस जगह दिया जाता है, जहां कोई व्यक्तिविशेष कानून से ऊपर उठने या फिर उसे कुचलने का प्रयास करता है।
इंग्लैंड के टेम्स नदी के किनारे बसे रानीमीड नामक स्थान पर 13वी सदी के आरंभ में किंग जॉन नामक राजा का राज था। राजा के कर सहित सामंतों को लेकर कई तरह के अन्यायपूर्ण क्रियाकलापों से ज़्यादातर सामंत उससे बहुत नाराज चल रहे थे। अब हुआ यह कि सामंतों की नाराजगी पर राजा ने विचार करने की बजाय उसे कुचलने के प्रयास किया। जिसके चलते यहां मामला उल्टा पड़ गया और सामंत शांत होने की बजाय और ज्यादा भड़क गए।
सिर्फ सामंत नाखुश होते तो भी शायद बात आई गई हो गई होती। लेकिन, विनाश काले विपरीत बुद्धि को अक्षरशः साबित करते हुए राजा किंग जॉन ने पोप को भी नाराज कर दिया। हुआ यह कि पोप द्वारा सुझाए गए व्यक्ति को राजा ने कैंटबरी का आर्कबिशप बनाने से मना कर दिया। सामंत नाराज़ थे तब तक तो मामला काबू में था, लेकिन जनता ने जब देखा कि राजा ने धर्म गुरु पोप के आदेशों की भी अवहेलना कर दी तो विद्रोह की चिंगारी शोलों में तब्दील हो गई।
मौके को नज़ाकत को भांपते हुए 15 जून, 1215 को पश्चिमी लंदन में थेम्स नदी के किनारे रनीमीड नामक जगह पर राजा किंग ज़ॉन ने सामंतों की बातों को मानते हुए करीब 4000 शब्दों वाले ऐतिहासिक दस्तावेज ‘मैग्ना कार्टा’ पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही दुनिया के इतिहास में पहली मर्तबा यह बात लिखित रूप से अंकित हो गई कि कोई भी आदमी कानून से ऊपर नही हो सकता। फिर चाहे हो उस कानून को बनाने वाला राजा ही क्यों ना हो। यह तय हुआ कि जो कानून प्रजा के लिए है वही कानूनी उतनी ही सख़्ती से राजा पर भी लागू होगा। यह सब कुछ अपने आप मे अभूतपूर्व था।
वैसे तो मैग्ना कार्टा की सभी धाराएं ही प्रभावित करने वाली थी, लेकिन राजा के पास से न्याय को प्रभावित कर किसी को बचाने और फंसाने का अधिकार नहीं छीन लेने का प्रावधान अपने आप में बेहद अहम था। साथ ही इसके प्रावधानों में यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं किया जा सकता। कानूनन तरीके से गिरफ्तार किए गए आरोपी को अपनी बात रखने के लिए उसे ‘निष्पक्ष सुनवाई’ का अधिकार भी दिया गया।
इसके अलावा भी मैग्ना कार्टा में कई ऐसे प्रावधान थे जो इसे उल्लेखनीय बना गए। 63 धाराओं वाले इस चार्टर में चर्च व्यवस्था और स्वतंत्र चुनाव तथा सामंतों के संबंध, नगर और वाणिज्य तथा व्यापारियों के अधिकार, साधारण वैधानिक व्यवस्था स्वायत्तशासन के दोषों का निराकरण, न्याय तथा विधि व्यवस्था में सुधार, चार्टर का प्रतिपादन तथा व्यवहार्य बनाना, कानून व्यवस्था आदि. प्रावधानों ने भी इसे कालजयी बना दिया।
वैसे दिलचस्प बात यह है कि इसको लागू करने के एक महीने बाद ही राजा किंग जॉन ने इसे निरस्त भी कर दिया था। राजा के इस कदम के बाद सामंतो को भी कड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस के राजा लुई से अपने ही राज्य और हमला करने के लिए कहना पड़ा। फ्रांस के राजा लुई ने सामंतो के आग्रह पर इंग्लैंड पर हमला कर दिया। इस हमले के कुछ महीने बाद ही राजा किंग जॉन की मृत्यु हो गई। और फिर उनके बाद उनके नौ वर्षीय बेटे हेनरी(तृतीय) को राजगद्दी पर बिठाया। और इसी के साथ मैग्ना कार्टा को दोबारा लागू कर दिया गया।
Related imageआपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब 1620 में इंग्लैंड के कई लोग अमेरिका गए। तब वह अपने साथ मैग्ना कार्टा की एक प्रति भी लेते गए। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका के समाज और संविधान में भी मैग्ना कार्टा को स्वीकारिता मिली। इतना ही नहीं, भारतीय संविधान में मौजूद मौलिक अधिकारों का प्रावधान भी 15 जून 1215 के दिन इंग्लैंड में लागू हुए ‘मैग्ना कार्टा’ से ही प्रभावित है। यही कारण है कि भारतीय संविधान में समाविष्ट मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद को हमारे संविधान का मैग्ना कार्टा कहा जाता है।
आज हर उस आदमी को मैग्ना कार्टा का शुक्रिया अदा करना चाहिए जो जीने का और अन्याय के विरोध अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त किए हुए है। मैग्ना कार्टा ही वह मूल है जिसके चलते हमे और आपको जीने का कानूनी अधिकार मिला हुआ है। साथ ही किसी भी न्यायिक मसले पर किसी फैसले से पहले अदालत में अपना पक्ष रखने की आज़ादी। चलते-चलते हम आपकों बता दें कि इस समय 1215 ईसवी वाले मैग्ना कार्टा की कुल चार मूल प्रतियां सुरक्षित हैं। इनमें दो ब्रिटिश लायब्रेरी में रखी गई हैं और एक-एक लिंकन और साल्ज़ब्रे कथीड्रल में मौजूद है।
रोशन सास्तिक 

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