मोदी सरकार के इस फैसले से जा सकती है 1 लाख हीरे कर्मचारियों की नौकरी

125
इस समय सुर्खियों में एक ऐसा नाम है जो अपने कर्मचारियों को दिवाली के अवसर पर 600 कार का तोहफा दे रहा है। जी हाँ, यह नाम है सूरत के डायमंड ट्रेडर सावजी ढोलकिया का। ऐसा करने वाले ढोलकिया उदारता के लिए राष्ट्रीय प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन हर कर्मचारी का ऐसा नसीब कहाँ जिसे तोहफे में एक कार मिले। कंपनी के प्रति उदारता दिखाने वाले कर्मचारियों का तोहफे के तौर पर अपने मालिक से कार पाना तब एक काल्पनिक कहानी प्रतीत होने लगती है जब एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने आती है जो खुशियां कम और गम ज्यादा देती है। डायमंड इंडस्ट्री की डरावनी सच्चाई तो ये है कि अगले छह महीने में भारत के डायमंड इंडस्ट्री में काम करने वाले हर 5 में से 1 कर्मचारी के मुंह का निवाला छीन सकता है। जेम & ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन कॉउंसिल के मुताबिक, कटे और पॉलिश किए गए हीरों पर बढ़ाए गए इम्पोर्ट ड्यूटी की वज़ह से रिकटिंग और रिडिजाइनिंग का बिजनेस चीन और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों की तरफ़ शिफ़्ट हो रहा है।
Image result for मोदी सरकार डायमंडसूरत में ढोलकिया जहां अपने वफादार कर्मचारियों पर तोहफों की बरसात कर रहे हैं वहीं कुछ कर्मचारियों पर इस दिवाली के बाद बदनसीबी के बादल भी मंडरा सकते हैं। कुछ दिन पहले सूरत में गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन (GDWU) ने अपना पहला धरना प्रदर्शन आयोजित किया था। यूनियन के सदस्यों ने दावा किया था कि गुजरात भर में लगभग 35% डायमंड वर्कफोर्स पिछले कुछ महीनों में अपनी नौकरी गवां चुका है। प्रदर्शन कर रहे डायमंड वर्करों ने रत्नदीप कौशल्य वर्धक स्कीम को शुरू करने की मांग की थी। साल 2009 में राज्य सरकार ने डायमंड वर्करों की स्थिति में सुधार हेतु इस स्कीम की घोषणा की थी। प्रदर्शनकारियों ने यूनिट मालिकों द्वारा उनके शोषण से बचाव हेतु लेबर लॉ को कड़ाई से लागू करने की भी मांग की थी। इसके साथ ही डायमंड वर्करों ने प्रोविडेंट फंड और इएसआई बेनिफिट्स के लिए भी अपनी आवाज को बुलंद किया था।
Image result for हीरा कर्मचारीसरकार ने करेंट एकाउंट डेफिसिट(CAD) को कम करने की दिशा में कदम उठाते हुए नॉन-एसेंशियल आइटम्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। सरकार ने 26 सितंबर को कटे और पॉलिश किए हुए हीरों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 5% से बढ़ाकर 7.5% कर दी है। डायमंड इंडस्ट्री एशियन करेंसी की कीमत में कमी, विदेशों से घटे मांग और बैंक क्रेडिट की कमी की मार झेल रही है। इस वित्तीय वर्ष के पहले छह महीने में कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात में 31.83 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जहां एक साल पहले यह निर्यात ₹7759.48 करोड़ का था वहीं यह घटकर ₹5289.35 करोड़ का रह गया। इंडस्ट्री के मुताबिक, घरेलू बाजार में भी हीरों की बिक्री में गिरावट आई है। इस तरह पूरे तस्वीर को देखने के बाद एक बात तो साफ़ हो चुकी है कि किसी का घर रौशन होगा तो किसी के घर अंधेरा छायेगा। अग़र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो अगले छह महीने में 1 लाख कर्मचारियों के हाथ से रोजगार जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here