मोदी सरकार के 5 साल बेमिसाल! विकास की नई बुलंदियों पर भारत, देशद्रोही इसे न पढ़ें

अब कुछ ही दिन और बचे हैं जब सबसे महंगे चुनाव आयोजन का आगाज हो जायेगा। इसमें 500 बिलियन रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। एक हिंदू, एक भारतीय और डॉक्टर संबित पात्रा का कट्टर समर्थक होने के नाते यह मेरा परम कर्तव्य है कि मैं आपको बता दूं कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को क्यों वोट करना चाहिए।

बैंगलोर दक्षिण से बीजेपी के लोकसभा उम्मीदवार तेजस्वी सूर्या ने ठीक ही कहा है कि यदि आप मोदी के साथ हैं तो आप भारत के साथ हैं। अगर आप एन्टी-मोदी हैं तो आप एन्टी-इंडिया हैं। यह चुनाव आपके राष्ट्रभक्ति, देश के प्रति प्रेम और एक भारतीय होने के पहचान का लिटमस टेस्ट है। मैं इस बात पर उतना ही विश्वास करता हूँ जितना कि मुझे इस बात पर भरोसा है कि यह धरती समतल है।

हमारे सुप्रीम लीडर चौकीदार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पिछले 5 साल के दौरान इसने देश में एन्टी-नेशनल सिटिजंस को आइडेंटिफाई किया है। कौन जानता था कि क़रीब 69% वोटर पाकिस्तानी एजेंट थे!

बरसों से हम इस धारणा के अधीन जी रहे थे कि आतंकवादी और नक्सली ही केवल हमारे देश के खिलाफ हैं। पिछले 5 सालों में इस धारणा में काफ़ी बदलाव आया और हमें एहसास हुआ कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स, अपने मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर, अपना कर्तव्य निभाने वाले जर्नलिस्ट भी हमारे देश के खिलाफ हैं। वे असली एन्टी-नेशनल हैं। आप इन्हें अर्बन नक्सल की भी संज्ञा दे सकते हैं। क्या आपने किसी सरकार को अपने नागरिकों को लेकर इतना क्रिटिकल देखा है, जो सरकार को लेकर इतने क्रिटिकल हैं।

इस सरकार के सत्ता में आने के बाद ही मुझे एहसास हुआ कि मैं एक हिंदू हूँ। मैं अंत में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार को देख सकता था। आज याद आया कि बचपन में होमवर्क पूरा न करने पर स्कूल के टीचर ने मुझे क्यों मारा था। वह टीचर एक मुस्लिम था और मैं एक हिंदू। इसी तरह मेरे कई दोस्त यह भूल ही चुके थे कि वे भारतीय हैं। वो तो शुक्र है कि थियेटर में नेशनल एंथम गाने के बाद याद आया कि हम भारतीय हैं।

अब जब ‘हिंदू’ और ‘बीजेपी’ की बात एक साथ आती है तो लोग आरोप लगाते हैं कि वे (बीजेपी) सेक्युलर नहीं हैं। मग़र सच्चाई यह नहीं है। इस समय वे (बीजेपी) देश में सबसे बड़े सेक्युलर हैं। कहो तो याद दिला दूँ! याद कीजिए नोटबंदी को। यह एक सफ़ल अथवा विफ़ल कदम था, इसपर मैं बात नहीं करूँगा। यह सेकेंडरी है। मोस्ट इम्पोर्टेंट बात तो यह कि इसने विविधता के बीच एकता के उद्देश्य की झलक पेश की। क़रीब 100 लोग जो लाइन में खड़े होकर मौत को प्यारे हो गए, वे सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं थे। उनमें हिंदू, ईसाई, जैन औऱ अन्य धर्म-सम्प्रदाय के लोग भी शामिल थे। यह सेक्युलरिज्म का बेजोड़ और यथार्थ नमूना है।

नोटबंदी के इतर सरकार ने एक और महत्वपूर्ण और कारगर क़दम उठाया। यह इलेक्टोरल बांड्स भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में एक कारगर कदम था। 2016 के फाइनेंस एक्ट ने 2010 के फॉरेन कंट्रीब्यूशन एक्ट में बदलाव किया, जिसके तहत अब एक राजनीतिक दल डोनर के नाम का खुलासा किये बग़ैर फॉरेन फंडिंग एक्सेप्ट कर सकता है। आप इस कदम की वजह से भ्रष्टाचार की कमर टूटते हुए देख सकते हैं। यह कदम पूरी तरह ट्रांसपैरेंट है।

महिलाओं की सुरक्षा इस सरकार की एक और महान उपलब्धि है। हमारे प्यारे चौकीदार नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि जब आप वोट करने के लिए पोलिंग बूथ में प्रवेश करें तो ‘निर्भया’ को याद रखें।

साल 2014 से लेकर अब तक रेप की एक भी घटना नहीं हुई है। और हाँ, महिलाओं पर किसी भी तरह का कोई अत्याचार नहीं हुआ है। वो अलग बात है कि हमें रेप के वारदातों के बारे में न्यूज़ देखने, सुनने और पढ़ने को मिलते रहे। मग़र ये सब मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश थी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। गुजरात के बीजेपी वाईस प्रेसिडेंट पर रेप के आरोप लगे थे। लेक़िन क्या आपको पता है कि ये आरोप बेबुनियाद और मान हनन के लिए लगाए गए थे। ये आरोप झूठे थे क्योंकि यह ख़बर रिपब्लिक टीवी पर नहीं दिखी थी।

ये सब खबरें उन न्यूज़ चैनलों या न्यूज़ पोर्टलों द्वारा दिखाए गए जो या तो कांग्रेस से फंडिंग पाए हुए थे, या फिऱ आईएसआई समर्थित थे। बीजेपी के लीडर और उनके कार्यकर्ता ऐसा कर ही नहीं सकते। उदाहरण के तौर पर उनके यंग लीडर योगी आदित्यनाथ को ही ले लीजिए। हम बात कर रहे हैं बीजेपी के फ़ायर ब्रांड लीडर योगी आदित्यनाथ की जिन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश में अपने औऱ बीजेपी के अन्य नेताओं के खिलाफ कुल 20,000 केस वापस लिए।

क्या आप इतिहास में उस नेता का नाम टटोल सकते हैं जिसके पास इतना गट्स हो कि वो ऐसा कर सके? वह रियल लाइफ गणेश गायतोंडे हैं। वह हिम्मत का चेहरा हैं। यही वह सरकार है जिसके लिए हिम्मत और साहस की परिभाषा सटीक बैठती है।

विज्ञान के क्षेत्र में भी बीजेपी के नेता प्रख्यात वैज्ञानिकों से कहाँ पीछे हैं। मानव संसाधन और विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा था कि डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत गलत है। उन्होंने यह कहते हुए अपने कथन को सही ठहराया था कि किसी ने भी लंगूर को इंसान में तब्दील होते नहीं देखा है।

प्यारे चौकीदार नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन जैसी कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा “जलवायु में परिवर्तन नहीं हुआ है, हम, मनुष्य बदल गए हैं”। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा था कि महाभारत के दौरान इंटरनेट मौजूद था। यह स्पष्ट रूप से भारतीय मंत्रिमंडल की क्षमता को दर्शाता है और यह दिखाता भी है कि वे राष्ट्र के वैज्ञानिक विकास को लेकर कितने गंभीर हैं। अब, हम जापान से आगे निकलने वाले हैं।

विपक्ष द्वारा एक बड़ा आरोप लगाया कि नौकरियों के सृजन में सरकार नाकाम रही है। सरकार ने स्पष्ट रूप से इस आरोप का खंडन भी किया है। मैं इस मोर्चे पर सरकार के साथ खड़ा हूँ। जब विवेक ओबेरॉय, अर्नब गोस्वामी और विवेक अग्निहोत्री जैसों को नौकरी मिल सकती है, तो देश में किसी को भी नौकरी मिल सकती है। नहीं कुछ तो, वह पकौड़े तो बना ही सकता है।

फिल्मों के शौकीन एक दर्शक के रूप में मैं हमेशा मनोरंजन की असीमित खुराक चाहता था। इस सरकार ने पिछले 5 वर्षों से हमारा मनोरंजन करने में कामयाबी हासिल की है। और यह सफलता ही काफ़ी है कि हम उन्हें फिऱ से वोट दें। क्योंकि फ़िर उनकी सरकार आएगी और कुछ पॉपकॉर्न के साथ हम अगले 5 वर्षों के लिए फिर से मनोरंजन का लाभ उठाएंगे।

~Shravan Pandey

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