मौत पर मातम की बजाय उसका मजाक बनाने का अमानवीय खेल आखिर कब तक?

पड़ोस में मरा आदमी कितना ही बुरा क्यों ना हो, लेकिन हम उसकी अंतिम यात्रा के वक्त सिर्फ उसके अच्छे कर्मों को हो याद करते हैं और उसको लेकर अच्छी बातें ही करते है। इस भाव के ऊपर किसी तरह की मजबूरी का बोझ नहीं होता बल्कि इसके पीछे मर्यादा छिपी होती है। हम सभी को यही बात बचपन से सिखाई जाती है कि किसी भी काम मौके की नजाकत को देखकर करना चाहिए।

लेकिन, आजकल हमारा समाज जिस नफरत की आग में जल रहा हैं उसमें हमारी सारी मान-मर्यादाएं जलकर खाक हो गईं हैं। और इस शर्मनाक सच्चाई की गवाही किसी भी व्यक्ति विशेष की मौत के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के Laughing Reaction चीख-चीखकर दे रहे हैं। और यह सारा खेल ‘क्रिया-प्रतिक्रिया’ जैसी बेवकूफियत जमीन पर खेला जा रहा है।

पहले लोग अपने दुश्मन की मौत पर भी इंसानियत के नाते आंसू तक बहा देते थे। फिर जब डिजिटल इंडिया का दौर आया तब भी ज्यादातर लोग महज औपचारिकता निभाने के खातिर ही सही, लेकिन किसी दुश्मन/पराए की मौत से जुड़ी पोस्ट पर Sad Reaction देकर औरRIP लिखकर इंसानियत के नाते अपनी संवेदनाएं प्रकट कर देते थे। और अगर उनसे इतना भी न बन पड़ता तो उस पोस्ट को इग्नोर कर आगे बढ़ जाते थे।

लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब डिजिटल इंडिया के इस दौर में ‘इंसानियत’ जैसी कोई चीज जिंदा रही ही नहीं, जिसके नाम पर लोग शैतानों वाली हरकत करने से खुद को रोकने का काम करें। आजकल लोग सारा दिन अपने वैचारिक/राजनीतिक विरोधियों खिलाफ सोशल मीडिया पर जहर उगलते लगते खुद इतने जहरीले हो गए हैं कि उनकी हर हरकत किसी सांप के दंश से ज्यादा खतरनाक हो गई है।

यही कारण है कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर अराजक तबका एक दूसरे के विपरीत विचार रखने वाले लोगों की मौत का मजाक उड़ा रहा है। पुलवामा हमले में जब हमारे देश के करीब 45 जवान शहादत की भेंट चढ़ गए। तब फेसबुक पर एक स्थान और धर्म विशेष तबका ऐसा भी था शहीदों की मौत पर मातम मनाने की बजाय Laughing Reaction देकर उनकी मौत का मजाक उड़ाने में लगा हुआ था। इतना ही नहीं तो कुछ यह यहां तक लिख रहे थे कि आतंकियों ने एक बॉल पर 45 विकेट गिरा दिए।

नफरत की इस आग को जलाने वालों को उस वक्त तो बड़ा मजा आया था, लेकिन इस आग की चपेट में आकर इसमें जलने के दर्द उन्हें भी जल्द मालूम पड़ गया। जी हां, इस क्रूर क्रिया की घिनौनी प्रतिक्रिया भी हुई। और यह तब हुआ कब न्यूजीलैंड में एक आतंकी हमले में 50 बेगुनाहों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। और इस मौके को क्रिया की प्रतिक्रिया करने की ताक में बैठे लोगों ने हाथों हाथ लिया और इस बार उन्होंने इन मौतों से जुड़ी पोस्ट पर कलेजे को ठंडा करते हुए Laughing Reaction दिए।

कभी न खत्म होने वाले क्रिया प्रतिक्रिया के इस खौफनाक खेल का नया शिकार हमारे देश के सबसे कर्मठ नेताओं में से एक दिवंगत मनोहर पर्रिकर हो गए।जी हां, हमें आपको बताते हुए बेहद दुःख हो रहा है और आप लोगों को भी यह जानकार बेहद हैरानी होगी कि कल जब सोशल मीडिया पर मौजूद ज्यादातर लोग मनोहर पर्रिकर के निधन पर अपने पोस्ट के जरिए अपना शोक व्यक्त कर रहे थे। तब न्यूजीलैंड वाले मामले के बाद क्रिया-प्रतिक्रिया के खेल में खार खाए तबके के लोग शोकाकुल पोस्ट पर Laughing Reaction देने के काम पर युद्ध स्तर पर जुट गई। यह भूलकर कि उनकी जलाई आग की जद में कल उनके घर का कोई आदमी भी आएगा।

– रोशन सास्तिक

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