रमज़ान में रोजा रखा है तो हमेशा रखें इन सात बातों का ख्याल!

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रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए साल का सबसे पाक महीना होता है। इस महीने में लोग 30 दिन का रोजा रख अल्लाह की इबादत करते हैं। रोजा रखने के दौरान सुबह सूरज उगने के बाद और शाम सूरज ढ़लने से पहले कोई अन्न तो दूर की बात, पानी के ग्लास तक को हाथ नहीं लगाते। लेकिन रोजा रखने का अर्थ सिर्फ दिनभर भूखे रहना ही नहीं होता। इसके अलावा और भी ऐसी कई चीजें हैं जिनका एक रोजेदार के लिए ख्याल रखना बहुत जरूरी है।
Ramjan Ka Mahina
तो चलिए जानते हैं रमज़ान के महीने में किन-किन बातों का रखना चाहिए ख्याल
रमज़ान के पवित्र महीने में अगर अल्लाह को सबसे ज्यादा कोई चीज नापसंद है, तो वह है झूठ। यही वजह है कि माह-ए-रमजान में झूठ बोलने, किसी की बुराई करने और किसी की झूठी कसम खाने पर उसका रोजा टूटा हुआ माना जाता है।
रमजान के पाक महीने में जब तक रोजा इफ्तार नहीं कर लिया जाता तब तक कुछ खाना तो बहुत दूर की बात आपके मन में कुछ खाने का ख्याल तक नहीं आना चाहिए।
बुरी आदतें तो साल के 365 दिन बुरी ही कहलाती हैं। लेकिन रमजान के पाक महीने में बुरी बातों और बुरी आदतों से दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत होती है।
Ramjan Ka Mahina
इस दुनिया में जीवन जीते हुए जाने-अनजाने इंसान से छोटी-बड़ी तमाम गलतियां हो जाती हैं। रमजान के महीने में अल्लाह की तरफ से एक अवसर होता है कि रोजेदार अपनी सारी गलतियों की माफी मांगकर पाक हो जाए।
रमजान के महीने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस महीने में किए जाने वाले अच्छे कर्मों के बदले आम दिनों की तुलना में 70 गुना ज्यादा पुण्य मिलता है।
वैसे तो कुरान मुसलमानों से अपनी जायज कमाई का एक हिस्सा जकात के रूप में गरीबों के लिए देने की बात तो करता ही है। लेकिन रमजान महीने में 70 गुना ज्यादा गुण मिलने के चलते रोजेदार लोग बढ़ चढ़कर गरीबों और जरूरतमंदों की यथासंभव मदद करते हैं।
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इस्लाम के अनुसार, रोजा केवल दिनभर भूखे-प्यासे रहने का नाम नही है। रमजान के महीने में 30 दिन अल्लाह की इबादत कर हम अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं। इन्हीं 30 दिनों के शुद्धिकरण की बदौलत हम अगले 11 महीने सही सलीके से जीवन जीने के लिए तैयार हो पाते हैं।

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