लोकसभा चुनाव 2019: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार, आइये आंकड़ों से जानें कुछ रोचक तथ्य

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार अब जल्द ही शुरू हो जाएगा। जी हाँ, भारत में लोकसभा चुनाव अब करीब आ चुका है। जहां एक तरफ़ भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार सत्ता के सिंहासन को हथियाने की कोशिश में होंगे तो वहीं दूसरी तरफ़ विपक्षी पार्टियां उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए पूरी जोर लगा रही हैं। क़रीब 130 करोड़ जनसंख्या वाला यह लोकतंत्र कई चरणों में चुनाव का आयोजन करवाता है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

तो आइए कुछ आंकड़ों के जरिये इस पूरे परिदृश्य को समझने की कोशिश करें।

करोड़ों की तादाद में मतदाता करेंगे भाग्य का फ़ैसला

पिछली बार जब साल 2014 में आम चुनाव आयोजित हुआ था तब उस समय भारत में 83 करोड़ लोग मतदान करने के योग्य थे। यह संख्या, साल 2017 में संयुक्त राज्य अमेरिका के वोटिंग ऐज पॉपुलेशन के तीन गुना से भी ज्यादा थी।

लेक़िन, क़रीब 55 करोड़ 30 लाख भारतीय मतदाताओं ने ही वोट किया। यह संख्या सभी पात्र मतदाताओं की 66 फ़ीसदी थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 460 से अधिक राजनीतिक दलों के 8,251 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया था।

चुनाव की यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा आयोजित की जाती है। यह एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पास 300 से अधिक फुल-टाइम अधिकारी हैं। इसका हेडक्वॉर्टर नई दिल्ली में है।

भारत के पार्लियामेंट के लोअर हॉउस यानी लोकसभा की 545 सीटों में से 543 सीटों के लिए लड़ाई है। बाकी के दो सीट एंग्लो-इंडियन कम्युनिटी के लिए आरक्षित हैं।

ये एंग्लो-इंडियन वो हैं जिनके पूर्वज वे यूरोपीय लोग हैं जिन्होंने औपनिवेशिक काल में भारतीयों के साथ विवाह किया है। इन सदस्यों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है।

साल 2014 में प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र में औसतन 15 उम्मीदवार थे। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के आंकड़ो के अनुसार, एक सीट के लिए सर्वाधिक उम्मीदवारों की संख्या 42 थी।

साल 2014 में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर में कुल 927,553 पोलिंग स्टेशन की स्थापना की थी। प्रत्येक लोकेशन पर औसतन 900 वोटर थे। ECI के गाइडलाइन के मुताबिक, कोई भी वोटर एक पोलिंग स्टेशन से 2 किलोमीटर से दूर नहीं हो सकता।

इतने विशाल आयोजन के लिए क़रीब 50 लाख सरकारी अधिकारी और सिक्योरिटी फ़ोर्स को लगाया जाता है। इन अधिकारियों और सिक्योरिटी फ़ोर्स को पैदल, सड़क, स्पेशल ट्रेन, हेलीकॉप्टर, नाव और कभी-कभी हाथियों का सहारा लेना पड़ता है।

अक्सर ये लोकेशन दूर-दराज़ के क्षेत्र में होते हैं, जहां सुविधाएं बहुत कम होती हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा सर्वे किये गए 80,000 से अधिक स्टेशनों पर मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी थी। पिछले साल रिलीज़ किये गए आंकड़ों के मुताबिक, 20,000 स्टेशन ऐसे थे जो फॉरेस्ट या सेमी-फॉरेस्ट इलाके में बनाये गए थे।

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुजरात के गिर फॉरेस्ट में एक पोलिंग स्टेशन स्थापित किया था। दिलचस्प बात तो यह है कि एशियाटिक लायंस के घरों में यह पोलिंग स्टेशन मात्र एक वोटर के लिए बनाया गया था।

वोटिंग कई चरणों में होती है। यह क़रीब एक महीने तक चलती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि चुनाव करा रहे अधिकारियों और सुरक्षा बलों को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर लगाया जा सके। कुल 543 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतों की गिनती एक ही दिन में होती है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 में कराए गए लोकसभा चुनाव में पूरी प्रकिया के लिए 38.7 बिलियन रूपया यानी 552 मिलियन डॉलर का ख़र्च आया था।

क्या है विवादित पहलू?

भले ही, सुचारू ढंग से इन आयोजनों को सम्पन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की प्रशंसा होती है मग़र हाल ही में विपक्षी दलों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। साल 2014 में 1.8 मिलियन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया था।

विपक्षी दलों का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में छेड़छाड़ किया जा सकता है। बता दें कि EVM को सर्वप्रथम साल 1982 में इंट्रोड्यूस किया गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि इलेक्शन कमीशन वोटों की जांच करने के लिए मतदाता-सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) प्रणाली का व्यापक रूप से उपयोग करे।

VVPAT एक ऐसा उपकरण है जो EVM से जुड़ा होता है और जिस उम्मीदवार को वोट दिया जाता है उसका सिंबल, नाम और सीरियल नंबर ले जाने वाले कागज की एक छोटी पर्ची प्रिंट करता है। यह मतदाता को थोड़े समय के लिए दिखाई देता है, और बाद में ECI द्वारा मतों के सत्यापन के लिए उपयोग किया जा सकता है।

फरवरी में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकारियों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों से मुलाकात की, लेकिन अभी तक यह घोषणा नहीं की है कि इस बार के दौर में व्यापक रूप से VVPAT सत्यापन का उपयोग कैसे किया जाएगा।

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