‘विश्वकप’ 2019 में खेलेंगी दुनिया की सिर्फ ‘दस’ टीमें

2019 का इंतजार अगर दुनिया का कोई देश सबसे ज्यादा बेसब्री से कर रहा है तो वह है भारत। 2019 को लेकर भारतीयों की इस बेसब्री के दो प्रमुख कारण हैं। पहला यह की क्या मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे और दूसरा यह की क्या 1983 और 2011 के इतिहास को दोहराते हुए भारतीय टीम 2019 का वर्ल्डकप जीत पाएगी? पहले वाले के बारे में पॉलिटिकल सोच वालों को सोचने दीजिए। हम क्रिकेट वाले हैं तो हम दूसरे वाले सवाल यानि वर्ल्डकप से जुड़े सवाल पर बात करते हैं।

अब तक हम यह जानते थे कि एकदिवसीय क्रिकेट मैच का वर्ल्डकप मुकाबला 2019 में होने जा रहा है लेकिन इस मुकाबले में कौन-कौन-सी टीमें हिस्सा लेंगी इस बात से अनजान थे। विश्वकप के लिए रैंकिंग में चोटी की आठ टीमों का खेलना तो तय था। बस अन्य दो टीमों के चुनाव के लिए आईसीसी ने क्रिकेट विश्वकप क्वालीफायर में भाग लेने वाली 10 टीमों को पाँच-पाँच के दो ग्रुप में बांटा।
इनमें वेस्टइंडीज, आयरलैंड, नीदरलैंड, पापुआ न्यूगिनी और आईसीसी विश्व क्रिकेट लीग डिवीज़न की विजेता एक ग्रुप में और अफगानिस्तान, जिम्बाब्वे, स्कॉटलैंड, हांगकांग और आईसीसी विश्व क्रिकेट लीग डिवीजन की उपविजेता को दूसरे ग्रुप में रखा गया था। इस मुकाबले के फाइनल में पहुंचने वाली दो टीमों (वेस्टइंडीज और अफगानिस्तान) ने वर्ल्डकप-2019 के लिए क्वालीफाई कर लिया।

विश्वकपयह तो हुआ समाचार लेकिन सवाल यह है कि हर चार साल में एक बार आयोजित होने वाले वर्ल्डकप जैसे मुकाबले में दुनिया की सिर्फ 10 टीमों को ही खेलने का मौका क्यों दिया जा रहा है? हाल ही में क्रिकेट खेलने की शुरुआत करने वाली टीमों को जब तक विश्वकप जैसे मुकाबलों में खेलने का मौका नहीं मिलेगा तब तक इन देशों के खिलाड़ियों और दर्शकों के अंदर इस खेल को लेकर जरूरी जोश-जुनून और समझ कैसे पैदा होगी? अपनी क्षमता से  बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद कुछ उभरते हुए क्रिकेट टीमों को विश्वकप जैसे बेहद महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होने का मौका क्यों नहीं मिल रहा है?
क्रिकेट की दिग्गज टीमें वैसे भी छोटी टीमों के खिलाफ खेलने से कतराती हैं और खेलना जरूरी हो जाए तो अपनी बी-टीम को भेज देती हैं। ऐसे में कम से कम अगर वर्ल्डकप जैसे ‘वैश्विक-आयोजन’ में छोटी टीमों को बड़ी टीमों के साथ खेलने का मौका मिले तो उन्हें सीखने का मौका तो मिलेगा ही और साथ में क्रिकेट वर्ल्डकप में जो वर्ल्ड शब्द है उसकी सार्थकता बढ़ जाएगी।

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