समाज की महिलाओं के लिए मिसाल बनने वाली पांच महिलाएं

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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जानते हैं भारत की उन पाँच महिलाओं के बारे में जिन्होंने अपने संघर्ष के बल पर न सिर्फ हमारे पुरुषप्रधान समाज में अपना एक विशेष स्थान बनाया बल्कि वह समाज की महिलाओं के लिए मिसाल भी बन गईं।

1) सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी को भारत के हैदराबाद शहर में हुआ था। वह भारत की आजादी के लिए लगातार संघर्षरत रहीं। सरोजिनी नायडू को स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव हासिल हुआ।

2) 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रधानाध्यापिका थीं। भारत में महिलाओं को शिक्षित करने के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य रहा है। प्लेग के रोगियों की सेवा करते-करते 10 मार्च 1897 को प्लेग के ही कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया।

3) गुजरात के नवसारी की रहने वाली होमी व्याराल्ला ने 1930 के दशक में फोटो-पत्रकारिता में कदम रखा। फोटो पत्रकार के तौर पर आजादी से जुड़े कई ऐतिहासिक क्षणों को अपने कैमरे में कैद कर उन्होंने उसे अमर कर दिया। व्याराल्ला को वर्ष 2011 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित किया गया।

4) मेधा पाटकर एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता तथा सामाज सुधारक हैं। भारत भर में वह नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक के तौर पर जानी जाती हैं। अपना पूरा समय नर्मदा नदी पर लगाने के लिए उन्होेंने अपनी पी.एच.डी. की पढ़ाई छोड़ दी थी।

5) 31 मार्च 1865 को जन्मी आनंदीबाई जोशी के पास भारत की पहली महिला डॉक्टर होने का गौरव है। जब ज्यादातर महिलाओं को अक्षर ज्ञान तक नहीं था तब डॉक्टर की डिग्री पाकर उन्‍होंने समाज में वह स्थान प्राप्त किया, जो आज भी एक मिसाल है।
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