सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि पर CRPF ने एक्सप्रेस किया रिजर्वेशन, अन्य बलों ने भरी हामी

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सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने अपने कर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु 57 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने के किसी भी कदम के बारे में रिजर्वेशन एक्सप्रेस किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ( CAPFs ) के लिए “यूनिफ़ॉर्म” सेवानिवृत्ति की उम्र पर जनवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गृह मंत्रालय (एमएएच) ने सभी रैंकों के बलों की राय मांगी थी।

वर्तमान में, केवल केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ( CISF ) और असम राइफल्स ( AR ) ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष निर्धारित की है। शेष चार बलों, सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के लिए कांस्टेबल से लेकर कमांडेंट (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) तक के पद पर तैनात जवान 57 साल में रिटायर होते हैं। जबकि उनके ऊपर के लोग 60 साल में रिटायर होते हैं। सीआरपीएफ को छोड़कर, अन्य सुरक्षा बलों ने सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के कदम का समर्थन किया है।

गृह मंत्रालय ( MHA ) को दिए अपने जवाब में CRPF ने कहा है कि उसके 80 प्रतिशत कर्मी कठिन क्षेत्रों में तैनात हैं। इसलिए, उन्हें एक युवा प्रोफ़ाइल की आवश्यकता है। एक वरिष्ठ CRPF अधिकारी ने कहा, “हम एक बल हैं जो लगातार तैनात है, और 80 प्रतिशत कठिन क्षेत्रों में हैं। हम दो सबसे खतरनाक युद्ध क्षेत्रों, वामपंथी चरमपंथ और कश्मीर में भी लड़ रहे हैं। हम कमांडिंग अधिकारियों के लिए एक यंगर प्रोफ़ाइल चाहते हैं। हमने सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के लिए ना नहीं कहा है, लेकिन अपना रिजर्वेशन एक्सप्रेस किया है। यह निर्णय गृह मंत्रालय ( MHA ) द्वारा लिया जाना है।

अधिकारी ने कहा कि चिंता यह भी है कि इस कदम से गतिरोध पैदा होगा। इसका मतलब यह होगा कि अगले तीन-चार वर्षों तक बल में कोई पदोन्नति नहीं होगी। इससे रैंकों में निराशा पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, बीएसएफ ने गृह मंत्रालय ( MHA ) को बताया कि उसके कर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, हालांकि वे फिट हैं। यद्यपि बीएसएफ कर्मियों द्वारा की जा रही ड्यूटी तथा पूर्वोक्त कर्तव्यों की कठोरता का सामना करने के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस दोनों की आवश्यकता होती है। बेहतर स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता, बेहतर पोषण की स्थिति, प्रौद्योगिकी के बढ़े हुए उपयोग आदि ने 57 साल के बाद भी कर्मियों का दक्षता स्तर बढ़ाया है।

BSF ने कहा है कि इसके कर्मी “पूरी तरह से फिट और मानसिक रूप से सतर्क इंडिविजुअल” के रूप में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिन्हें निजी क्षेत्र द्वारा फिर से नियोजित किया जा रहा है। यह देखते हुए कि भारत में जीवन प्रत्याशा लगभग 70 वर्ष है, BSF ने कहा है कि यदि इसके कार्मिक और तीन वर्षों तक सेवा में रहते हैं तो कोई समस्या नहीं है। CISF ने कहा है कि अधिक अनुभवी और प्रशिक्षित लोग, फ़ोर्स को अधिक कुशलता से काम करने में मदद करेंगे। एक वरिष्ठ सीआईएसएफ अधिकारी ने कहा, “हमारे पास पहले से ही 60 साल पर सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी हैं। हम किसी भी समस्या का सामना नहीं कर रहे हैं। वास्तव में, यह अच्छा है कि हमारे पास अधिक अनुभवी लोग हैं।”

सूत्रों ने कहा कि आईटीबीपी और एसएसबी ने भी सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के कदम के समर्थन में इसी तरह के तर्क दिए हैं। जनवरी में, जस्टिस एस मुरलीधर और संजीव नरूला की दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा था कि CAPFs के दो विंग के सदस्यों के बीच सेवानिवृत्ति की आयु के मामले में CAPFs के मनोबल को “निश्चित रूप से संरक्षित करने की आवश्यकता है” और “भेदभाव” मनोबल को बढ़ाने के बजाय कम करेगा।” अदालत उन याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी जो मांग कर रही थीं कि सभी सीएपीएफ कर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 60 वर्ष की जाए।

~Shravan Pandey

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