फ़िल्मी दुनिया की नकल से लगाई धोखाधड़ी की अकल

बेटे को दिल्ली स्कूल में एडमिशन दिलाने के लिए बिज़नेसमैन ने पहना गरीबी का चोला

फ़िल्मी पर्दे पर दिखाई जाने वाली कुछ घटनाएं ‘रील लाइफ़’ से हटकर ‘रियल लाइफ़’ में आ जाती हैं। हमारे देश में बच्चों को शिक्षा दिलाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम बन चुका है। अगर आप अपने बच्चे को अच्छे स्कूल में एडमिशन दिलाना चाहते हैं तो आपको ‘डोनेशन’ के तौर पर मोटी रकम स्कूल प्रशासन के हवाले करना पड़ता है। आज हर कोई चाहता है कि उसका बच्चा एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने जाए। अभिभावक के इसी महत्वाकांक्षा का फायदा उठाते हुए स्कूल प्रशासन मोटी रकम की मांग कर लेता है। सरकारी स्कूलों में गिर रहे शिक्षा के स्तर की ही देन है कि लोगों को निजी स्कूलों की तरफ रुख़ करना पड़ रहा है। निज़ी स्कूलों के ढेर सारे नियमों का पालन करते हुए अपने बच्चों के पीछे मोटी रकम ख़र्च करने वाले अभिभावकों की हालत नाज़ुक हो जाती है।

अगर आपने ‘हिंदी मीडियम’ फ़िल्म देखी होगी तो आपको यह मालूम होगा कि किस तरह वाल्ड सिटी में रहने वाले एक युगल ने खुद को झोपड़पट्टी में रहने वाला दिखाया था। एक ऐसी ही घटना दिल्ली के चाणक्यपुरी की है जहां एक बिजनेसमैन ने अपने बेटे को दिल्ली स्कूल में एडमिशन दिलाने के लिए खुद को झोपड़पट्टी में रहने वाला दिखाया। दरअसल, इस शख्स ने चाणक्यपुरी के संस्कृति स्कूल में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के कोटे में अपने बड़े बेटे को दाखिला दिलाने के लिए चार साल पहले ऐसी घटना को अंजाम दिया जिसकी किसीको भनक तक नहीं लगी।

साल 2013 में गौरव गोयल नामक बिजनेसमैन ने अपने बड़े बेटे को संस्कृति स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए चाणक्यपुरी के नजदीक संजय कैम्प नामक झोपड़पट्टी का एड्रेस दिया था। गोयल ने कथित तौर पर अपने आय के कागज़ातों में हेरफेर कराकर अपना सालाना आय 67,000 करवा दिया था। सिर्फ इतना ही नहीं गोयल ने जाली वोटर आईडी और बर्थ सर्टिफिकेट भी बनवा लिया था। बच्चे को दाखिला दिलाते वक्त गोयल ने खुद को MRI Centre पर काम करने वाला बताया था। बड़ी बात तो यह है कि ना तो बच्चे का आचरण और ना ही अभिभावकों के साथ हुई बातचीत से सच्चाई का पता चल पाया।

इस झूठ से पर्दा उठना उस वक़्त शुरू हुआ जब इस साल गोयल अपने दूसरे बेटे का दाखिला sibling quota के अंतर्गत कराने के लिए गए। जब स्कूल प्रशासन ने बड़े बेटे के रिकॉर्ड को सत्यापित करना शुरू किया तो भेद खुल गया। इस दौरान मिले काफ़ी ख़ामियों को लेकर स्कूल प्रशासन पुलिस के पास गई। पुलिस ने गोयल को उत्तर दिल्ली के जवाहर नगर स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। DCP मधुर वर्मा ने कहा कि पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी हुई है कि वो कौन से लोग हैं जिन्होंने जाली कागजात बनाने में गोयल की मदद की।

छानबीन के दौरान पुलिस ने पाया कि गौरव गोयल के पास अपना खुद का एक MRI Lab है। इसके अलावा वह दालों का होलसेल बिजनेस भी करता है। गोयल अब तक 20 देशों का सफर भी कर चुका है। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, स्कूल प्रशासन को उस वक़्त शक हुआ जब गोयल ने स्कूल प्रशासन से कहा कि कई सालों बाद अब उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो गया है। अब वह अपने बड़े बेटे को  EWS कोटे से हटाकर General Category में शिफ्ट करना चाहता है। जब गोयल ने Safdarjung Enclave अपार्टमेंट का अपने रेजिडेंस के तौर पर ज़िक्र किया तब स्कूल प्रशासन के शक को और मजबूती मिल गयी।

इसके बाद चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने MCD, FRRO और IT रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि गोयल अपने बिजनेस से अच्छा खासा कमाई करता है। इस मामले के बाद सरकारी विभागों के कई अधिकारी पुलिस की नज़र में हैं जिन्होंने गोयल को फ़र्जी कागजात मुहैया कराने में मदद की होगी। यहाँ तक कि दूसरे बेटे के दाखिले के लिए बनवाया गया एड्रेस प्रूफ भी फ़र्जी पाया गया। स्कूल प्रशासन ने पुलिस को बताया कि बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया है।

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