1.5 लाख रुपया जुर्माना भरो और 100 पेड़ लगाओ…नाबालिग को नौकरी पर रखने की अनोखी सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दम्पति के खिलाफ चल रहे आपराधिक कार्यवाही को ख़त्म करने पर सहमति जता दी है। इस दम्पति ने एक नाबालिग़ लड़की को घरेलू नौकर के तौर पर अपने घर पर रखा था। आपराधिक कार्यवाही ख़त्म करने के पीछे कुछ शर्त हैं जो अपने आप में एकदम अलग तरीके के हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दम्पति पीड़ित नाबालिग़ लड़की को 1.5 लाख रुपया मुआवजा दे और 100 पेड़ लगाये।

खबर के मुताबिक, Justice Najmi Waziri ने दो अन्य लोगों को भी आदेश दिया कि वे वृक्षारोपण और पेड़ों की देखभाल के लिए मैनुअल सहायता प्रदान करें। बता दें कि ये दो लोग वो एजेंट हैं जिन्होंने उस नाबालिग लड़की को दम्पति के घर पर नौकरी पर लगाया था। दम्पति पर जुर्माना लगाने के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों एजेंटों को 10,000 रुपये का भुगतान करने को कहा, जो नाबालिग के मुआवजे की ओर जाएगा।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि 100 पेड़ लगाने का निर्णय दम्पति द्वारा पश्चाताप व्यक्त करने के बाद आया है। इसके अलावा, प्रशासनिक मशीनरी पर अनावश्यक बोझ डालने की वजह से किसी प्रकार के सामाजिक कार्य में संलग्न होने की इच्छा जताई है। इसलिए कोर्ट ने प्रत्येक को दिल्ली में 50 पेड़ लगाने का आदेश दिया है। TOI के मुताबिक, उन्हें दक्षिण डिवीजन के लिए वनों के डिप्टी कंजर्वेटर को रिपोर्ट करने को कहा गया है जो उन्हें सेंट्रल रिज में 10 दिनों के लिए पेड़ लगाने का काम सौंपेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि पेड़ों को तीन-साढ़े तीन साल की नर्सरी उम्र और कम से कम छह फीट की ऊंचाई के साथ देशी किस्म का होना चाहिए।

कथित तौर पर, राजौरी गार्डन पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत गैरकानूनी अनिवार्य श्रम को चोट पहुंचाने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कथित तौर पर, नाबालिग को घरेलू काम के लिए तीन महीने तक अवैध कारावास में रखा गया था। पिता की सहमति से दोनों एजेंटों द्वारा उसे दिल्ली लाया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि जब भी उससे कोई गलती हुई पीड़िता से शारीरिक रूप से मारपीट की गई और उसे उसके काम की अवधि के लिए मुआवजा नहीं दिया गया।

A Child labour works at under construction new Punjab University Block of sec 25 in Chandigarh on Tuesday, even as the World is celebrating World Day Against Child Labour. PHOTO: BALISH AHUJA

भारत में चाइल्ड लेबर की समस्या

जहां बेरोजगारी की समस्या भारतीय सामाजिक-आर्थिक परिवेश को त्रस्त कर रही है, वहीं बाल श्रम एक और खतरा बन गया है। यूनिसेफ के अनुसार, भारत में बाल-श्रम केवल कारखानों से अनौपचारिक घरेलू सेटअपों में स्थानांतरित हो गया है। जिससे इसका पता लगाना कठिन हो जाता है। विभिन्न प्रकार की मशीनरी के माध्यम से केंद्र सरकार ने काम करने की न्यूनतम उम्र को बढ़ाकर 14 साल तक करने की कोशिश की है, लेकिन समस्या के आंकड़ों पर अंकुश लगाने में सफलता नहीं मिली है। बच्चों को अभी भी बड़े पैमाने पर रोजगार दिया जाता है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 14 वर्ष से कम उम्र के 10.1 मिलियन बाल श्रमिक थे।

हाईकोर्ट का स्वागत योग्य यह कदम अन्य लोगों के लिए निवारक के रूप में कार्य कर सकता है जो जानबूझकर या अनजाने में घरेलू काम के लिए बच्चों को नियुक्त करते हैं। अनौपचारिक सेटिंग्स में बाल श्रम खतरनाक और प्रच्छन्न है, जिससे बच्चे इस प्रैक्टिस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इसके साथ, लोगों को न केवल खुद को बल्कि अपने आस-पास के अन्य लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि बाल श्रम की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके या सबसे अच्छा होता कि रोका जा सके।

~Shravan Pandey

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