2002 Patiya Naroda Case: जमानत याचिका पर हलफनामा दायर करे गुजरात सरकार

44

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गुजरात सरकार से कहा कि वह 2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार ( 2002 Patiya Naroda Case ) मामले में दोषियों में से एक प्रकाश राठौड़ की जमानत याचिका के संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दायर करे। पीठ ने गुजरात सरकार को उसी मामले में एक चौथे दोषी द्वारा एक आवेदन पर सुनवाई करने के लिए नोटिस जारी किया, जिसने चिकित्सा आधार पर जमानत मांगी थी।

न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर ( AM Khanwilkar ) और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ( Ajay Rastogi ) की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने पहले दोषी बाबू बजरंगी को स्वास्थ्य आधार पर जमानत दी थी। बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। पीठ ने मंगलवार को प्रकाश राठौड़ की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट ( Aparna Bhatt ) को न्यायमूर्ति खानविल्कर ने मामले में पीड़ितों / गवाहों के लिए पेश होने और बहस करने के लिए कहा था। अपर्णा भट्ट ने शीर्ष अदालत के समक्ष राठौड़ की जमानत याचिका का विरोध किया था। उन्होंने दावा किया था कि प्रकाश राठौड़ को जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उसके पास हथियार और गोला-बारूद थे। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि प्रकाश राठौड़ को कैसे काम करने का निर्देश दिया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दंगा 28 फरवरी, 2002 को गुजरात के अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में हुआ था।यहाँ एक उग्र भीड़ ने 97 लोगों को मार डाला था। मरने वालों में से अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय से थे। यह हत्याकांड, गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के जलने के एक दिन बाद हुआ था, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर दंगा हुआ था। आपको बता दें कि गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती ट्रेन के एस-6 कोच में मुस्लिमों द्वारा आग लगाए जाने के बाद 59 कारसेवकों हिन्दुओ की मौत हो गई थी।

~Shravan Pandey

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here