24 मार्च विश्व क्षय दिवस (World Tuberculosis Day) पर ख़ास

भारत 2025 तक टीबी फ्री होने के लिए कार्यरत: PM मोदी

आज विश्व क्षय दिवस( वर्ल्ड ट्यूबरकुलोसिस डे) मनाया जा रहा है. इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करके लोगों से इस रोग से लड़ने का आह्वान किया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जहां एक तरफ विश्व ने 2030 तक टीबी मुक्त होने का लक्ष्य निर्धारित किया है वहीँ दूसरी तरफ भारत 2022 तक टीबी मुक्त होने के लिए कार्यरत है. इस मौके पर शनिवार को प्रधानमंत्री ने लोगों और संस्थाओं से आह्वान किया कि एक जुट-होकर आगे आयें और इस बीमारी को जड़ से ख़त्म करें. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया, “इस बार विश्व टीबी दिवस का थीम है ‘वांटेड: लीडर्स फॉर अ टीबी फ्री वर्ल्ड’ (“Wanted: Leaders for a TB-free world’). टीबी मुक्त विश्व मानवता के लिए एक बड़ी सेवा है.”

विश्व टीबी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरुक कर स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक रूप से पड़ने वाले बुरे असर को दूर करना है. टीबी एक संक्रामक रोग है. टीबी का बैक्टीरिया फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित करता है. अगर लम्बे समय तक इसके तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो यह शरीर के माध्यम से फ़ैलने लगता है. यह किडनी, पेट, मस्तिष्क, गर्भाशय तथा फैलोपियन ट्यूब को भी ग्रसित कर देता है. जनन-टीबी पति-पत्नी के लिए बड़ी समस्या पैदा कर देता है. इंदिरा IVF हास्पिटल, दिल्ली  में IVF एक्सपर्ट डॉ आरिफा आदिल के अनुसार, वैसे तो टीबी के लक्षण आसानी से मालूम नहीं पड़ते मगर सही वक्त पर इलाज न होने से इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं. संक्रमण गर्भाशय तक पहुँच सकता है जिससे अंतर्गर्भाशयकला कमजोर हो सकता है. इस वजह से भ्रूण के विकास में बाधा आ सकती है. महिलाओं में यह बीमारी पुरानी है जिसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं पड़ते. यह बांझपन का सबसे बड़ा कारण है.

ट्यूबरक्लोसिस में विश्व और भारत:

जहां पूरे विश्व में टीबी के 20 लाख से ज्यादा मामले हैं वही भारत इस मामले में टीबी से होने वाले मौतों के दर में विश्व में दूसरे स्थान पर है. HIV पॉजिटिव लोगों में मौत का सबसे बड़ा कारण टीबी है. 2016 में 40 फीसदी HIV मौत के लिए टीबी जिम्मेदार है. अकेले 2012 में 8.6 मिलियन टीबी से पीड़ित  लोगों का इलाज हुआ जिसमें से 1.3 मिलियन रोगियों की मौत हो गयी.

टीबी से सबसे ज्यादा ग्रसित हैं महिलाएं:

इंडियन काउन्सिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के नवीनतम अध्ययन में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं. इन आँकड़ों में बताया गया है कि IVF प्रोसेजर के लिए आने वाली 50 फीसदी से ज्यादा महिलाओं में जनन-टीबी पाया गया है. 95 फीसदी से ज्यादा मामलों में पाया गया कि फैलोपियन ट्यूब पर असर पड़ा है. 50 फीसदी अंतर्गर्भाशयकला और 30 फीसदी अण्डाशय के प्रभावित होने के मामले सामने आये हैं. यद्यपि यह किसी भी (15 से लेकर 45) आयु-वर्ग में हो सकता है लेकिन औसतन आयु 31 वर्ष पाया गया है. ज्यादातर मामलों में देखा गया कि रोग के लक्षण को पहचानना मुश्किल था. दिल्ली एनसीआर(NCR) की घटनाओं के रिपोर्ट पर नजर डालें तो मालूम पड़ता है कि टीबी से प्रभावित हर 5 महिलाओं में से एक महिला प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में असमर्थ थी. इस तरह 40 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो टीबी की वजह से प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं कर पायीं.

टीबी से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां:

  1. पूरे विश्व में मौत के लिए जिम्मेदार शीर्ष 10 बिमारियों में टीबी भी शामिल है.
  2. टीबी के बैक्टीरिया का नाम मैकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस है. यह अक्सर फेफड़े को निशाना बनाता है.
  3. इस रोग का इलाज संभव है और इसे बढ़ने से रोका जा सकता है.
  4. टीबी से होने वाले मौत में 95 फीसदी से ज्यादा देश निम्न और मध्यम आय वाले हैं.
  5. टीबी हवा के माध्यम से फ़ैलने वाला संक्रामक बीमारी है. जब टीबी से  ग्रसित लोग खांसते हैं, छींकते और थूकते हैं तब वो टीबी के रोगाणुओं को हवा में फैलाते हैं. इन रोगाणुओं की थोड़ी सी ही संख्या एक आदमी को अपना शिकार बनाने के लिए काफ़ी है.
  6. सात ऐसे देश हैं जो अकेले 64 फीसदी टीबी रोगियों के घर हैं. इस दौड़ में भारत शीर्ष पर है. भारत के बाद क्रमशः इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, पाकिस्तान, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं.
  7. एक आंकलन का अनुसार, साल2016 में 1 मिलियन बच्चे टीबी के शिकार हुए जिसमें से (HIV और TB) पीड़ित 250000 बच्चे मौत के मुंह में समा गए.
  8. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट टीबी (MDR-TB) जन स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है.6 लाख नए मामलों में से 4 लाख 90 हजार मामले MDR-TB से सम्बंधित थे. वैश्विक स्तर पर टीबी के मामले 2 फीसदी के वार्षिक दर से कम हो रहे हैं. अगर 2020 तक टीबी को ख़त्म करने वाले रणनीति को सफल बनाना है तो फिर इस पतन दर को 4 से 5 फीसदी वार्षिक दर तक बढ़ाना होगा.
  9. आँकड़ों के मुताबिक़, साल 2000 से2016 के बीच टीबी का इलाज करके 53 मिलियन लोगों की जिंदगी बचाई गयी.

10. सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) में इस बीमारी को भी शामिल किया गया है. 2030 तक इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. 

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